गुरुवार, 01 जनवरी, 2009 को 09:14 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान ने कहा है कि अमरीका की तरफ़ से उस पर ज़की उर रहमान लखवी समेत लश्करे तैबा के अन्य नेताओं को भारत के हवाले करने का कोई दबाव नहीं है.
अमरीकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक ख़बर में कहा गया था कि पाकिस्तान पर प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के गिरफ़्तार नेताओं को भारत सौंपने के लिए अमरीका दबाव डाल रहा है.
जब इस सिलसिले में बीबीसी संवाददाता एजाज़ महर ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता फ़रहत उल्लाह बाबर से पूछा तो उनका कहना था, "पाकिस्तान पर अमरिका की तरफ़ से लश्करे तैबा के गिरफ़्तार नेताओं को भारत के हवाले करने का कोई दबाव नहीं है."
हमलावर-एजेंसी का संबंध
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार पाकिस्तान के अलावा अमरीकी एजेंसियों के पास भी ऐसे फ़ोन रिकार्ड मौजूद हैं जिसमें पाकिस्तानी चरमपंथी ज़रार शाह और ताज महल होटल के एक हमलावर के बीच बातचीत हुई थी.
फ़रहत उल्लाह बाबर कहना है, "यदि भारत पुख़्ता सबूत देता है तो वो पाकिस्तानी क़ानून के तहत देश के अंदर कार्रवाई करेगा."
उनका कहना है, "किसी के ख़िलाफ़ पक्के सबूत मिलने के बाद ऐसी कार्रवाई होगी जो पूरी दुनिया को नज़र आएगी."
'सरकार की चिप्पी से बदनामी'
उधर पाकिस्तान के रवैये पर बुधवार को भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि पाकिस्तान इनकार का रवैया अपनाए हुए है.
उनका कहना है, "अगर कोई इनकार पर आमादा है तो उसे कुछ भी जानकारी सौंपी जाए, वह इनकार ही करेगा."
चिदंबरम के अनुसार पाकिस्तानी टीवी चैनलों ने ही दिखाया है कि मुंबई हमलों के दैरान पकड़े गए चरंमपंथी के पिता ने माना है कि आमिर अजमल कसाब उनका बेटा है.
दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकता अनसार बरनी ने पाकिस्तान के गृह सचिव को पत्र लिख कर कहा है कि अजमल के पाकिस्तानी होने या न होने पर सरकार की चुप्पी से पाकिस्तान बदनाम हो रहा है.
बरनी के अनुसार मीडिया ने अजमल के पाकिस्तानी नागरिक होने के लिए काफ़ी सबूत दे दिए हैं.