शुक्रवार, 26 दिसंबर, 2008 को 01:38 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
मुंबई में सबसे लंबे समय तक चरमपंथियों की गोलियों का शिकार हुआ ताज पैलेस होटल खुल तो चुका है लेकिन अब भी आम लोगों को होटल के बहुत पास जाने की इजाज़त नहीं है.
हालांकि बड़ी संख्या में सैलानी एक बार फिर गेटवे ऑफ इंडिया और ताज पैलेस होटल का रुख कर रहे हैं ताकि इसे एक बार और देख सकें.
मुंबई के राम सूर्यवंशी सरकारी अधिकारी हैं और चरमपंथी हमले के महीने भर बाद ताज को देखने आए हैं. वो कहते हैं, ‘‘ ये मुंबई की नहीं पूरे देश की शान है. मैंने तो अपनी लाइफ में पहली बार इसके साथ फोटो भी खिंचवा ली है.’’
वो कहते हैं, ‘‘ ताज पर हमला हुआ लेकिन जब मैं आज इसको देखता हूं तो मेरे दिल का डर निकल जाता है. ये मेरे लिए अब मंदिर जैसा हो गया है. ये हमें इन हमलों से लड़ने की ताकत भी दे देता है. इसलिए मैंने ताज के साथ फोटो खिंचवाया.’’
सूर्यवंशी तो मुंबई के हैं लेकिन कई लोग बाहर से भी आए हुए हैं. कर्नाटक से आए एक सैलानी कहते हैं कि वो तो बस ताज देखने ही मुंबई आए हैं.
विदेशों से आने वाले सैलानियों की संख्या में कमी ताज के पास नहीं दिखती है और बड़ी संख्या में विदेशी टूरिस्ट दिखते हैं जो कहते हैं कि उन्हें भारत में बहुत ज्यादा डर नहीं लगता है.
हालांकि ताज और गेटवे आफ इंडिया के बीच की जगह अभी भी आम लोगों के लिए खुली नहीं है और न ही ताज पूरी तरह खुल सका है.
ताज के पीछे के हिस्से में मरम्मत का काम चल रहा है लेकिन ताज के बाहर यहां रुकने वाले लोग खेलते हुए दिख ज़रुर जाते हैं.
ताज के सामने सैलानियों की भीड़ में कुछ चीज़ें बदल गई हैं. सुरक्षा थोड़ी बढ़ी है लेकिन परेशानियां भी बढ़ गई है.
ताज के पास दूरबीन किराए पर देने वाले विठ्ठल कांबले कहते हैं कि तकलीफ़ें बढ़ गई हैं.
वो कहते हैं, ‘‘ मैं यहां 12 साल से काम कर रहा हूं. हमले के बाद अब लोगों का आना कम हो गया है. पैसा नहीं कमा पा रहे हैं. लोग और पुलिस अलग तंग करती है. सुरक्षा बढ़ी है तो पुलिसवाले हमें तंग करते हैं.’’
कांबले थोड़ी दबी जबान में पुलिसवालों की बुराई करते हैं लेकिन ताज के पास फोटो खींचने वाले रामदेव बहुत गुस्से में दिखते हैं.
वो कहते हैं, ‘‘ ये पुलिसवाले तो आतंकवादियों को रोक नहीं पाते हैं हमें रोकते हैं. रोज़ी रोटी कमाने से रोकते हैं. इनका तो बहुत पुराना धंधा है ऐसा. हम लोगों को परेशान करना.’’
रामदेव साफ बताते हैं कि लोग कम तो आ रहे हैं और साथ ही कहते हैं कि अब कोई भी गेटवे आफ इंडिया के साथ तस्वीर नहीं खिंचवाना चाहता.
वो कहते हैं, ‘‘ पहले तो लोग ताज के साथ कम फोटो खिंचवाते थे और गेटवे के साथ अधिक लेकिन अब तो सारे लोग ही ताज के साथ फोटो खिंचवाते हैं.’’
जब रामदेव हमसे बात कर रहे थे तभी पुलिसवालों ने उन्हें भगाना शुरु कर दिया. पुलिसवालों ने हमसे बात नहीं की लेकिन लग रहा था कि उन पर सुरक्षा बढ़ाने का दबाव बरकरार है.