गुरुवार, 25 दिसंबर, 2008 को 10:31 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने नैटो से वहाँ के सामूहिक क़ब्रिस्तानों की सुरक्षा करने की अपील की है.
ऐसा माना जाता है कि इन क़ब्रिस्तानों में दो हज़ार से अधिक तालेबान लड़ाकों के शवों को दफ़न किया गया था.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि अज्ञात हथियारबंद लोग इन कब्रिस्तानों से शरीर के अवशेषों को चुरा ले जाते हैं.
ये क़ब्रिस्तान के उत्तरी राज्य ज़वाज़ान में स्थित है. 1997 और 2001 के बीच तालेबान विरोधी सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए तालेबान लड़ाकों को यहाँ दफ़न किया गया था.
अवशेषों की चोरी
उधर, नैटो के प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें अभी तक इस तरह का कोई अनुरोध नही मिला है कि क़्रबिस्तान की रक्षा करें.
बीबीसी से हामिदज़ादा ने कहा, "दाश्त-ई-लैली में मौजूद इस क़ब्रिस्तान से शरीर के अवशेषों को हटाने के प्रयास किए गए और हम नैटो से सहायता मांग रहे हैं."
अफ़ग़ानिस्तान के मानवाधिकार आयोग के प्रवक्ता ने नादेर नादेरी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ अज्ञात हथियारबंद लोग क़ब्र खोदकर शरीर के अवशेषों को चुरा ले जाते हैं.
नादेरी इसे युद्ध अपराधों के भौतिक सबूतों को नष्ट करने की कोशिश मानते हैं.
नैटो के प्रवक्ता कैप्टन मार्क विंडसर ने बीबीसी से कहा कि उन्हें अभी तक इस तरह का कोई अनुरोध नहीं मिला है.
ख़बरों के मुताबिक उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में नवंबर 2001 में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद सैकड़ों तालेबान लड़ाकों की मौत हो गई थी.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन लोगों को जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम की सेना तालेबान नार्दन एलायंस ने पकड़ा था.
रिपोर्टों के मुताबिक इन लोगों को ट्रकों में भरकर कुंदुज़ से मज़ारे-ए-शरीफ़ से पश्चिम में स्थित शेबरघान नामक कस्बे की जेल में लाया गया था.
इस दौरान ट्रकों में क्षमता से अधिक लोगों के होने के कारण उनका दम घुटने लगा. इससे इनमें से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे अफ़ग़ानिस्तान में इस तरह के क़रीब 20 कब्रिस्तान हैं.