सोमवार, 22 दिसंबर, 2008 को 03:38 GMT तक के समाचार
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि पाकिस्तान की ज़मीन पर पनप रहे चरमपंथी संगठन पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं.
उन्होंने दिल्ली में सोमवार से भारत के विभिन्न देशों में नियुक्त राजदूतों के दो दिवसीय एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर सबूतों की अनदेखी करने और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम न उठाने का आरोप लगाया.
सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय राजदूतों का एक सम्मेलन शुरू हुआ है जिसे भारत-पाकिस्तान संबंधों की ताज़ा स्थिति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
सोमवार को इस दो दिवसीय सम्मेलन का उदघाटन विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने किया.
राजदूतों की बैठक में विदेश मंत्री ने कड़े लहजे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पाकिस्तान अगर कोई कार्रवाई नहीं करता, तो भारत के सभी विकल्प खुले हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने वायदों को पूरा करना होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व समुदाय की ओर से पाकिस्तान पर चरमपंथ को रोकने के लिए जो दबाव बनाया जाना चाहिए था, वो नहीं हुआ है.
सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राजदूतों को संबोधित करने वाले हैं.
हालांकि सम्मेलन के आयोजन का कार्यक्रम पहले से तय था लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि राजदूतों का यह सम्मेलन पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की रणनीति की दृष्टि से भारत के लिए अहम हो सकता है.
पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों में खटास लगातार बढ़ती जा रही है और अब इस लिहाज से इस सम्मेलन पर भी प्रेक्षकों की नज़र है.
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान दोनों नेता राजनयिकों को यह सुझाव देंगे कि दुनिया के देशों में भारत के पक्ष को किस रूप में रखा जाए, और यह बताया जाए कि भारत में जारी चरमपंथ का संचालन पाकिस्तान से होता है.
इस बीच अमरीकी राजदूत मलफोर्ड ने गृह मंत्री पी चिदंबरम से मुलाक़ात की है.
बढ़ता तनाव
ग़ौरतलब है कि पिछले महीने मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से ही दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी तीखी और तेज़ हो चुकी है.
भारत का कहना है कि जिन चरमपंथियों ने मुंबई को निशाना बनाया, वे पाकिस्तान के हैं और इसे देखते हुए पाकिस्तान को अपनी ज़मीन पर चरमपंथ को रोकने के लिए तत्काल कड़े क़दम उठाने चाहिए.
पर पाकिस्तान भारत की ओर से दी जा रही इस दलील को बेबुनियाद बता रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि भारत इस बारे में ठोस सबूत दे तभी कुछ किया जा सकता है.
इस मुद्दे पर दोनों ओर से तीखी बयानबाज़ी जारी है.
जहाँ भारत ने अब कहा है कि चरमपंथ नहीं रोका गया तो भारत कोई भी कड़ा क़दम उठा सकता है. वहीं पाकिस्तान का कहना है कि वो किसी दबाव में आने वाला नहीं है. अगर पाकिस्तान पर संकट आता है तो पाकिस्तान की सरकार उसके लिए तैयार है.
उधर अमरीका ने भी ताज़ा बयान में कहा है कि पाकिस्तान को चरमपंथ से निपटने के लिए कड़े क़दम उठाने की ज़रूरत है.
भारत का रुख सख़्त
रविवार को भारत ने पाकिस्तान पर कूटनयिक दबाव बढ़ाते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया और पाकिस्तान के रुख़ को चिंताजनक बताया.
विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने रविवार को कोलकाता में कहा कि मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को जब इस बात के सबूत दिए गए कि सभी चरमपंथी पाकिस्तानी थे, और उन लोगों और संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाय जो इसके लिए जिम्मेदार थे, तो पाकिस्तान ने पहले कहा कि कोई प्रमाण नहीं हैं, फिर कहा, कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों का वास्ता पाकिस्तान की सरकार से नहीं है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अभी तक ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है. भारत के धैर्य की परीक्षा ली जा रही है, और इससे निबटने के लिए भारत के सामने सभी विकल्प खुले हैं.
उधर रविवार को ही प्रणब मुखर्जी के बयान की गंभीरता का सबूत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बयान से भी मिल गया, जब उन्होंने जम्मू में कहा कि भारत के सदाचार को पाकिस्तान, भारत की कमज़ोरी न समझे. भारत के पास मुंह-तोड़ जवाब देने की पूरी ताक़त है.
उधर पाकिस्तान ने भी कहा है, कि वह किसी भी तरह के हमले का सामना करने के लिए तैयार है.