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रविवार, 21 दिसंबर, 2008 को 06:35 GMT तक के समाचार

एडम मायनॉट
बीबीसी न्यूज़, मुंबई से

मुंबई हमले: पुलिस कार्रवाई पर सवाल

ताज होटल में हुए चरमपंथी हमले में बचे हुए कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस जिस तरह से फँसे हुए लोगों को निर्देश दे रही थी उससे चरमपंथियों के हाथों मरनेवालों की संख्या ज़्यादा हो सकती थी.

हमले में बचे हुए लोगों में से एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने जान बचाने के लिए ताज होटल में छुपे हुए कुछ लोगों से कहा था कि वहाँ से निकल जाने में कोई ख़तरा नहीं है.

लेकिन जब ये लोग वहाँ से निकलने की कोशिश कर रहे थे तो वे चरमपंथियों की गोलीबारी का निशाना बन गए.

लेकिन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान के प्रभारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इन आरोपों का खंडन किया है.

संदेह

एक मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशांत मंगेशीकर भी उन सैकड़ों लोगों में एक थे जो चरमपंथियों के हमले के दौरान होटल में फँसे गए थे.

हमलावर अंधाधुंध गोलियां चला रहे थे. डरे सहमे डॉक्टर प्रशांत ने कुछ और लोगों के साथ जान बचाने के लिए अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया था.

उनका कहना था,'' सुबह के वक़्त जब पुलिस किसी तरह हम तक पहुँची तो उन्होंने कहा यहाँ से बाहर जाना सुरक्षित है क्योंकि हमलावर दूसरे तल पर चले गए हैं.''

कुछ लोग आगे चले गए लेकिन डॉक्टर प्रशांत ने वहीं ठहरने का फ़ैसला किया.

उन्होंने बताया, " मुझे थोड़ा अंदेशा था कि पुलिस जिस रास्ते से जाने के लिए कह रही थी वहीं से हमलावर लोगों को निशाना बना रहे थे."

उन्होंने जानकारी दी, " मैंने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया और वे सभी 20 से 30 लोग जो आगे गए थे, सब के सब मारे गए."

एक अन्य ड्रेस डिज़ाइनर शिल्पा बताती हैं कि पुलिस की इस ग़लती से मेरी चाची का जान चली गई और मेरा चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया.

शिल्पा कहती हैं कि पुलिस कार्रवाई बहुत ख़राब थी. उनका कहना है कि पुलिस को कोई अधिकार नहीं है कि वो लोगों की ज़िंदगी को ख़तरे में डाले.

उल्लेखनीय है कि पुलिस कार्रवाई को लेकर लोगों की आलोचनाएँ बढ़ती जा रही हैं.

हालांकि इस कार्रवाई के इंचार्ज वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अपने पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है.

ग़ौरतलब है कि मुंबई में चरमपंथी हमले में 170 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी.