शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2008 को 08:55 GMT तक के समाचार
राजस्थान में एक सप्ताह तक चली ज़बर्दस्त खींचतान के बाद राज्य मंत्रिमंडल का गठन हो गया है. कुल तेरह मंत्री शामिल किए गए हैं. ग्यारह मंत्रियों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है जबकि दो को राज्यमंत्री बनाया गया है.
शुक्रवार को राज्यपाल एसके सिंह ने राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए गए मंत्रियों को राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
अशोक गहलोत ने 13 दिसंबर को राज्य के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली थी और उन्होंने अकेले ही पद और गोपनीयता की शपथ ली थी.
राजनीतिक विशलेषकों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से राज्य मंत्रिमंडल का गठन इस लिए टाला जा रहा था क्योंकि कांग्रेस के पास बहुमत से कुछ कम विधायक हैं और सरकार पहले बहुमत का जुगाड़ पुख़्ता करना चाहती थी.
चुनावों में 200 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस को 96 सीटें मिली थीं जोकि पूर्ण बहुमत से पाँच सीटें कम होती हैं. मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को 78 सीटें मिली थीं.
संतुलित मंत्रीमंडल
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राजस्थान विधानसभा
विधानसभा क्षेत्र-200
कांग्रस- 96
भाजपा- 78
बसपा- 06
सीपीएम-03
अन्य- 15
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हालांकि सरकार को कुछ निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है और इसी वजह से मत्रिमंडल में कुछ निर्दलीय विधायकों को भी शामिल किया गया है.
विशलेषकों के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रिमंडल के गठन में क्षेत्र, जाति, धर्म और लिंग के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है.
राज्य में मीणा और जाट राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली जातियाँ मानी जाती हैं और इन दोनों जातियों को मंत्रिमंडल में मुनासिब प्रतिनिधित्व दिया गया है.
जाट जाति से संबंधित तीन विधायक मंत्री बनाए गए हैं तो राज्य की अनुसूचित जनजाति मीणा बिरादरी को भी उनका हक़ अदा किया गया है.
एक मुसलमान विधायक को मंत्री बनाया गया है साथ ही एक महिला को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.
ग़ौरतलब है कि गहलोत मंत्रिमंडल के गठन को लेकर काफ़ी मेहनत कर रहे थे और दिल्ली भी गए थे ताकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस विषय पर चर्चा कर सकें.
सत्तावन वर्षीय अशोक गहलोत दूसरी बार राज्य के मुख्य मंत्री बने हैं. इससे पहले 1998 -2003 के बीच वो राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.