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बुधवार, 17 दिसंबर, 2008 को 15:23 GMT तक के समाचार

'सबूत नहीं कि हमलावर पाक के थे'

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस बात के कोई ठोस सुबूत नहीं हैं कि मुंबई पर हमला करने वाले लोग पाकिस्तान से आए थे.

भारतीय, अमरीकी और ब्रितानी अधिकारी यही कहते आए हैं कि इस बात के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं कि इन हमलों की जड़ें पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में हैं.

लेकिन राष्ट्रपति ज़रदारी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अब भी इस दावे को सच साबित करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है.

लेकिन उन्होंने वायदा किया कि अगर इस मामले में कोई सुबूत पेश किया जाता है तो उनका देश कड़ी कार्रवाई करेगा.

पिछले महीने मुंबई में हुए हमले में 170 से ज़्यादा लोगों की जानें गई थीं और भारत ने इनके लिए चरमपंथी गुट लश्करे तैबा को ज़िम्मेदार ठहराया था.

आसिफ़ अली ज़रदारी ने इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ऐलन लिटल से कहा कि यदि इन हमलों में किसी पाकिस्तानी की भागीदारी के पर्याप्त सबूत मिल जाते हैं तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी.

उन्होंने कहा, "अगर ऐसा वक़्त आता है, और जब भी आता है, मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि हमारी संसद, हमारा लोकतंत्र हमारे संविधान और क़ानून के अंतर्गत पूरी कार्रवाई करेगा".

उन्होंने कहा कि पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस बारे में कोई ठोस सबूत मुहैया नहीं कराया है कि इन हमलों की योजना पाकिस्तान की सरज़मीन पर तय की गई और जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती वह किसी नतीजे पर नहीं पहुँचना चाहते.

पुष्टि नहीं हुई है

राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा कि अभी तक इस दावे की भी पुष्टि नहीं हुई है कि एकमात्र जीवित बचे हमलावर की उसके अपने पिता ने शिनाख्त की है और यह बताया है कि वह पाकिस्तान का है.

इस हमलावर का नाम मोहम्मद अजमल आमिर क़साब बताया गया है और वह भारतीय पुलिस की हिरासत में है.

उन्होंने यह भी कहा कि जमात-उद-दावा के अध्यक्ष हाफ़िज़ सईद घर में नज़रबंद रहेंगे.

ज़रदारी ने कहा, "मैं आपको यक़ीन दिलाता हूँ कि किसी भी जाँच में अगर उनका किसी तरह की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का सबूत मिलता है तो उन पर इस अपराध के लिए मुक़दमा चलाया जाएगा".

जमात-उद-दावा पर आरोप लगाया जाता है कि वह लश्करे तैबा का ही एक अंग है जबकि जमात ने इस बात से इनकार किया है.

राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा कि उन्होंने भारत से इस जाँच में सहयोग के लिए कहा है और जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती वह कोई क़यास नहीं लगाना चाहते.