बुधवार, 17 दिसंबर, 2008 को 13:05 GMT तक के समाचार
लोकसभा अध्यक्ष ने 'वोट के बदले नोट' मामले की जाँच के लिए गठित संसदीय समिति की रिपोर्ट की आलोचना करने वाले सांसदों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.
'वोट के बदले नोट' मामले की जाँच के लिए गठित संसदीय समिति ने सोमवार को समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह और कांग्रेस पार्टी के नेता अहमद पटेल को 'क्लीन चिट' दी थी.
लोकसभा में इस मुद्दे पर हंगामा तब हुआ जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक सांसद ने संसदीय समिति की जाँच पर सवाल उठाते हुए दूरसंचार मंत्रालय की ज़रिए '2-जी स्पेक्ट्रम' के आवंटन पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन की माँग की.
संसद की गरिमा
जब 'वोट के बदले नोट' मामले की जाँच रिपोर्ट पर टिप्पणियाँ होती रहीं तब स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ख़ासे नाराज़ हो गए.
सोमनाथ चटर्जी का कहना था, "इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होने जा रही है. जिस तरिक़े से ये लोग रिपोर्ट की आलोचना कर रहे हैं, मैं ऐसा करने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ. ये लोग संसद की गरिमा जान-बूझकर गिरा रहे हैं."
चटर्जी का कहना था, "आप संयुक्त संसदीय समिति की माँग कर रहे हैं, लेकिन जब ये रिपोर्ट सौंपेगी तो उसकी आलोचना करेंगे."
उनका इशारा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मोहम्मद सलीम और भापजा के नेता वीके मलहोत्रा की तरफ़ था जिन्होंने संसदीय समिति की रिपोर्टों से ख़ुद को अलग कर लिया था.
लोकसभा अध्यक्ष ने संदिग्ध 2-जी स्पेट्रम घोटाले, जिसे 'वोट के बदले नोट' के समान क़रार देते हुए कहा कि एक जैसे मुद्दे को संसद में एक बार से अधिक नहीं उठाया जा सकता है.
इससे पहले बासुदेव अचार्य ने संसद में इस विषय पर बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव भी रखा था. जबकि भाजपा के नेता अनंत कुमार सहित उनकी पार्टी के अन्य नेताओं का कहना था कि उन्हें रिपोर्ट पर आलोचना करने का अधिकार है.
कम्युनिस्ट नेता गुरुदास दास गुप्ता ने स्पीकर के कथन पर आपत्ति जताई.
ग़ौरतलब है कि इस वर्ष जुलाई में लोकसभा में विश्वासमत हासिल करने के लिए तीन सांसदों की कथित ख़रीद-फ़रोख़्त के मामले में सात सदस्यों की एक जाँच समिति का गठन किया गया था.