सोमवार, 15 दिसंबर, 2008 को 22:24 GMT तक के समाचार
भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार रात चरमपंथ से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के गठन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी.
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसके लिए ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (उन्मूलन) अधिनियम 1967 में संशोधन किए जाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी.
बैठक के बाद जारी सरकारी बयान में कहा गया कि कैबिनेट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल क़ानून में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है.
बयान में आगे कहा गया कि इस आशय के विधेयकों को संसद में पेश किया जाएगा.
मुंबई में हुए हमलों के बाद गृहमंत्री का पद संभालने वाले पी चिदंबरम ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी बनाने की वकालत की थी.
ग़ौरतलब है कि मुंबई में गत 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों के बाद इस तरह की एजेंसी गठित किए जाने के प्रस्ताव ने जोर पकड़ा था.
हालांकि इस तरह की एक जाँच एजेंसी बनाए जाने का प्रस्ताव काफ़ी समय से विचाराधीन था.
अनेक राज्य अपराधों को संघीय सूची में डाल कर उनकी जाँच केंद्रीय एजेंसी को दिए जाने पर असहमति व्यक्त कर चुके हैं.
लेकिन मुंबई चरमपंथी हमलों के बाद इस मसले पर सहमति सी नज़र आने लगी है.
इसके मद्देनज़र सरकार ने इस जाँच एजेंसी के गठन के प्रस्ताव को संसद में पेश करने का फ़ैसला किया है.
उल्लेखनीय है कि मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों से उपजे हालात की समीक्षा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में संघीय जाँच एजेंसी बनाने, केंद्र-राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने, क़ानूनी ढाँचा और ख़ुफ़िया एजेंसियों को मज़बूत बनाने पर सहमति बनी थी.