गुरुवार, 11 दिसंबर, 2008 को 10:09 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करे. लोकसभा में मुंबई हमलों की चर्चा के दौरान उन्होंने ये बातें कही.
उन्होंने पाकिस्तान की ज़मीन पर से काम कर रहे आतंकवादी गुटों पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की ईमानदारी पर सवाल उठाया और कहा कि लश्कर-ए-तैबा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को नज़रबंद करना काफ़ी नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान से 40 भगोड़ों को सौंपने के लिए कहा है. विदेश मंत्री कि भारत ने पाकिस्तान से यह भी कहा है कि वह अपने देश में आतंकवादियों की संरचना को ख़त्म करने के लिए सकारात्मक क़दम उठाए.
लोकसभा में मुंबई हमलों पर हो रही चर्चा के दौरान प्रणव मुखर्जी ने कहा, "हमने पाकिस्तान को 40 लोगों की सूची दी है जिन्हें भारत में आपराधिक या आतंकवादी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया है."
इन 40 लोगों में माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम भी शामिल है, जिस पर आरोप है कि उन्होंने ही 1993 में मुंबई में हुए धमाकों की साज़िश रची थी.
विदेश मंत्री ने कहा, "हमने गृह सचिव स्तर, विदेश सचिव स्तर और आतंकवाद के मुद्दे पर हुई चार बैठकों के दौरान ये नाम दिए हैं. हम पाकिस्तान की सरकार से ये कह रहे हैं कि वह कार्रवाई करे. सिर्फ़ इरादा जताना काफ़ी नहीं है."
इनकार
उन्होंने पाकिस्तान के उस दावे को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आतंकवादियों का सरकार से कोई लेना-देना नहीं है, इन हमलावरों के लिए पाकिस्तान 'नॉन स्टेट एक्टर' शब्द का इस्तेमाल करता है.
पाकिस्तान का बिना नाम लिए हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा, "क्या नॉन स्टेट एक्टर आसमान से टपकते हैं, क्या ये दूसरे ग्रह से आते हैं? ऐसे तत्व देश की ज़मीन से ही काम करते हैं."
उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान कुछ सकारात्मक क़दम उठाएगा. विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ये फ़ैसला तो पाकिस्तान की सरकार को ही करना है.
विदेश मंत्री का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय न तो भारत की उपेक्षा कर सकता है और न ही कोई देश भारत पर हमले करने की हिम्मत दिखा सकता है.
प्रणव मुखर्जी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति को कथित तौर पर फ़ोन करने के बारे में भी स्पष्टीकरण दि और कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति को फ़ोन नहीं किया था और फ़ोन करने की बात झूठी है.
उनका कहना था कि उन्होंने सिर्फ़ एक बार और वो भी इस्लामाबाद में राष्ट्रपति ज़रदारी से बात की थी.