मंगलवार, 09 दिसंबर, 2008 को 09:30 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान ने कहा है कि हाल ही में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के सिलसिले में उसने अपने जिन नागरिकों को गिरफ़्तार किया है, उन्हें भारत को नहीं सौंपा जाएगा.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के मुताबिक ये गिरफ़्तारियाँ पाकिस्तान अपने स्तर पर जाँच के लिए कर रहा है.
उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरी हुआ तो वे पाकिस्तान की स्थिति के बारे में स्पष्टिकरण देने भारत जाएँगे.
मुंबई में हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने कई ठिकानों पर छापे मारकर कुछ लोगों को पकड़ा है.
ख़बरों के मुताबिक पकड़े गए लोगों में लश्कर ए तैयबा से जुड़े लोग भी शामिल हैं.
पीटीआई के मुताबिक मुल्तान में पत्रकारों से बात करते हुए क़ुरैशी ने कहा, "मुंबई हमलों की जाँच में भारत पाकिस्तान के साथ पूरा सहयोग करेगा लेकिन इस हमले से जुडे किसी भी पाकिस्तानी नागरिक का मुकदमा पाकिस्तानी अदालत में ही चलेगा."
ठिकानों पर हमला
पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा के एक कैंप पर धावा बोला था.
माना जा रहा है कि मुंबई में चरमपंथी हमलों के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में ये क़दम उठाया है.
इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट ने ख़बर दी थी कि अमरीका और भारत ने पाकिस्तान को लश्कर पर कार्रवाई के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी है.
मुंबई में कई जगह 26 नवंबर की देर शाम चरमपंथी हमले हुए थे. इन हमलों में 180 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोग घायल हुए थे.
चरमपंथियों के ख़िलाफ़ करीब 59 घंटों तक कमांडो कार्रवाई चली थी.
पुलिस ने एक चरमपंथी अजमल अमीर कसाब को जीवित पकड़ने में सफलता हासिल की थी जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो पाकिस्तान का रहने वाला है.
अमरीका ने पाकिस्तान द्वारा चरमपंथी ठिकानों पर छापे मारने के क़दम की सराहना की है.