मंगलवार, 09 दिसंबर, 2008 को 02:33 GMT तक के समाचार
लगातार पिछले कई विधानसभा चुनावों में हारने के बाद कांग्रेस राजस्थान, दिल्ली और मिज़ोरम में मिली सफलता ने पार्टी को उत्साह से भर दिया है.
भाजपा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल की है.
कांग्रेस की ये जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले साल लोक सभा चुनाव होने हैं. भाजपा जैसे विरोधी दल के नेता इसे डूबता हुआ जहाज़ बताने लगे थे.
पिछले कुछ समय से कांग्रेस के लिए कुछ अच्छा होता दिखाई नहीं दे रहा था.
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ख़ुद प्रचार अभियान में नहीं गईं थीं.
कांग्रेस उत्साहित
दूसरी ओर प्रचार के दौरान ही मुंबई में चरमपंथी हमला हुआ था जिसे अब तक का सबसे बड़ा चरमपंथी हमला माना गया और ऐसी आशंका जताई जाने लगी कि चरमपंथ का मुद्दा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है.
हालांकि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह कहते हैं कि यदि मुंबई की घटना नहीं होती तो पार्टी का प्रदर्शन और बेहतर रहता.
कुछ महीने पहले कर्नाटक में और इसके पहले गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा था.
गुजरात में हार पार्टी के लिए बड़ा झटका थी क्योंकि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ प्रचार अभियान का नेतृत्व किया था.
इसके अलावा पार्टी को उत्तराखंड, पंजाब, केरल और मेघालय में भी झटका लगा था.
साथ ही पार्टी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और नगालैंड में अपनी कोई छाप नहीं छोड़ सकी थी.
पार्टी की सफलताएँ गिनी चुनी थीं. उसने हरियाणा और असम के विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की थी और महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्ववाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ वो सरकार बनाने में कामयाब हुई थी.
पार्टी की जीत से उत्साहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा, "अब कांग्रेस को कोई नहीं रोक सकता."
शीला दीक्षित की तिकड़ी
दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने जीत की तिकड़ी लगाई है. पार्टी को 69 में से 42 सीटें मिली हैं.
जबकि भाजपा को 23 सीटें मिली हैं. भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में महंगाई और आतंकवाद को मुद्दा बनाया था.
दिल्ली में बहुजन समाज पार्टी ने दो सीटें जीती है, जबकि लोकजनशक्ति पार्टी के खाते में भी एक सीट आई है. निर्दलीय के खाते में एक सीट आई है.
मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद दिल्ली में मतदान हुआ था. इस कारण माना जा रहा था कि भाजपा को यहाँ फ़ायदा हो सकता है. लेकिन कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल कर लिया है.
राजस्थान
राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार को तगड़ा झटका लगा है. यहाँ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस को 200 में से 96 सीटों पर जीत हासिल हुई है.
भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ़ 78 सीटें ही मिल पाई है. लेकिन कांग्रेस के पास बहुमत से पाँच सीटें कम हैं. ऐसी स्थिति में अन्य पार्टियों और निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.
राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी ने छह सीटें हासिल की है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को तीन सीटें मिली हैं.
जनता दल (यू) ने भी एक सीट हासिल की है. समाजवादी पार्टी को एक सीट मिली है. जबकि निर्दलीय के खाते में 14 सीटें आई हैं.
मिज़ोरम
मिज़ोरम में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की है. पार्टी ने 10 साल बाद सत्ता में वापसी की है. मिज़ो नेशनल फ़्रंट को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
कांग्रेस ने 40 में से 32 सीटों पर जीत हासिल की है. जबकि मिज़ो नेशनल फ़्रंट सिर्फ़ तीन सीटें जीत पाया है.
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की अगुआई में विकास के नारे के सहारे भाजपा ने फिर वापसी की है.
यहाँ 90 सीटों में से भाजपा ने 50 पर सफलता हासिल की है, वहीं कांग्रेस को 38 सीटें मिली हैं.
बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा ने भी दो सीटें जीती हैं.
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर ली है और परिणामों के मुताबिक़ पार्टी को 230 में से 143 सीटें मिली हैं.
कांग्रेस पार्टी ने 71 सीटों पर जीत हासिल की है. बसपा को सात सीटें मिली हैं जबकि उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी को सिर्फ़ पाँच सीटें मिली हैं.
कांग्रेस ने सरकार विरोधी मतों के आधार पर मध्य प्रदेश में जीत का दावा किया था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
जानकारों का मानना है कि राज्य से पार्टी के कई कद्दावर नेताओं की आपसी खींचतान के कारण पार्टी को नुक़सान हुआ है.
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि उनकी पार्टी नतीजों का विश्लेषण करेगी.