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सोमवार, 08 दिसंबर, 2008 को 15:18 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश

हाई कोर्ट ने दिया मायावती को झटका

उत्तर प्रदेश उच्च न्यायलय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें उन्होंने 18 हज़ार पुलिस कर्मियों की भर्ती निरस्त कर दी थी.

मुख्यमंत्री बनते ही मायावती ने मुलायम सिंह सरकार के कार्यकाल में भर्ती किए गए 18 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती निरस्त कर दी थी.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों की भर्ती के दौरान घूस लिया गया था और भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ बरती गई थी.

मायावती के इस आदेश से प्रशासन और पुलिस विभागों में हड़कंप मच गया था.

बर्ख़ास्त किए गए सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने मुख्यमंत्री के आदेश के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में अपील की थी.

अमान्य

न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि क़ानून की नज़र में पुलिसकर्मियों की सेवा निरस्त करने का आदेश अमान्य है.

न्यायमूर्ति डीपी सिंह का कहना था कि इस मामले की जाँच करने वाले दो पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र और जावेद अख़्तर भी पुलिस कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया मे शामिल थे. इससे जाँच की पूरी प्रकिया प्रभावित हुई.

आदेश में यह भी कहा गया कि बर्ख़ास्त किए गए पुलिस कर्मियों को कोई नोटिस नहीं दिया गया. साथ ही उन्हें किसी भी तरह का स्पष्टीकरण देने का मौक़ा नहीं दिया गया जो प्राकृतिक न्याय के ख़िलाफ़ है.

मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने की थी.

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मायावती के इस निर्णय की आलोचना की थी और पुलिसकर्मियों की फिर से बहाली की माँग की थी.

समाजवादी पार्टी ने उच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है.

हालाँकि मायावती पुलिसकर्मियों की फिर से बाहली के मूड में नही दिखती है. वे इस आदेश के ख़िलाफ़ बड़ी खंडपीठ में विशेष अपील दायर करेंगी.