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बुधवार, 03 दिसंबर, 2008 को 06:40 GMT तक के समाचार

भारत-पाक तनाव के बीच राइस पहुँचीं

मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद पैदा हुई परिस्थितियों, विशेष तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का जायज़ा लेने के लिए अमरीकी विदेशमंत्री कोंडोलीज़ा राइस बुधवार सुबह दिल्ली पहुँच गई हैं.

ग़ौरतलब है कि इन हमलों में मारे जाने वाले लगभग 200 लोगों में छह अमरीकी नागरिक भी थे.

कोंडोलीज़ा राइस भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाक़ात करेंगी. बीबीसी हिंदी के वॉशिंगटन संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार, भारत के बाद उनके पाकिस्तान जाने की संभावना है.

महत्वपूर्ण है कि राइस का दौर उस समय हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में मुंबई के हमलों के बाद ख़ासा तनाव पैदा हो गया है.

भारत-पाक रिश्तों में शक़, अविश्वास

भारत ने इन हमलों में पाकिस्तान में मौजूद तत्वों का हाथ बताया है लेकिन पाकिस्तान ने हमलों की जाँच में सहयोग का वादा करते हुए ये भी कहा है कि उसके सामने 'पाकिस्तानी हाथ' के कोई पुख़्ता सबूत नहीं रखे गए हैं.

इससे दोनों देशों के बीच शक़ और अविश्वास पैदा हो गया है. भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में वर्ष 2004 में शुरु हुई भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा.

इसलिए विदेश मंत्री राइस की यात्रा का एक अहम मकसद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाना है.

'पाकिस्तान सहयोग करे'

ब्रसेल्स में राइस ने कहा था कि पाकिस्तान को पारदर्शिता से भारत के साथ सहयोग करने की ज़रूरत है.

पाकिस्तान ने कहा है कि वह भारत के साथ हमलों की संयुक्त तौर पर जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार है.

इससे पहले ख़बरें आई थीं कि अमरीकी अधिकारियों ने भारत को मुंबई पर चरमपंथी हमला होने की संभावना के बारे में बताया था. लेकिन कोंडोलीज़ा राइस ने इसकी पुष्टी नहीं की है.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस का भारत दौरा राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के इस आश्वासन के बाद हो रहा है कि 'अमरीका पूरी तरह से भारत के साथ है' और वह मुंबई हमलों की जाँच में हर संभव मदद करेगा.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने रविवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से फ़ोन पर बात की थी. बातचीत में राष्ट्रपति बुश ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आश्वस्त किया था कि अमरीका भारतीय जनता के साथ है.

कूटनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राष्ट्रपति बुश का आश्वासन और फिर कोंडोलीज़ा राइस का दौरा इस बात के संकेत हैं कि अमरीका चरमपंथी हमलों के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी चिंतित है.