रविवार, 30 नवंबर, 2008 को 15:32 GMT तक के समाचार
मुंबई में लगभग 60 घंटे चली चरमपंथी त्रासदी के बाद रविवार की सुबह वहाँ दहशत का महौल रहा और लोगों में हताशा दिखी.
हालांकि न सुरक्षाबलों का जमावड़ा दिखा, न कमांडो की भागमभाग दिखी और न ही मीडियाकर्मियों की बड़ी भीड़, मानो देश की व्यावसायिक राजधानी में एक तरह का डर हवा में घुला हुआ हो.
शनिवार को ताज होटल में चरमपंथियों के साथ हुई अंतिम कार्रवाई के बाद यह त्रासदी औपचारिक रुप से ख़त्म हो गई. इन हमलों ने पूरे देश और एक तरह से दुनिया को हिला के रख दिया है.
मुंबई में बुधवार, 26 नवंबर की रात कई जगह एक साथ शुरु हुए इन चरमपंथी हमलों में कम से कम 195 लोग मारे गए और तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए.
मरने वालों में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के दो कमांडो, आतंकवादी निरोधी दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकरे सहित महाराष्ट्र पुलिस के 15 अधिकारी और जवान, आरपीएफ़ का एक जवान और होमगार्ड के दो जवान शामिल हैं.
इन हमलों ने कम से कम 22 विदेशी नागरिकों की भी जान ली है. ये जर्मनी, अमरीका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली, सिंगापुर, थाईलैंड और फ्रांस के थे.
भारत ने आरोप लगाया है कि हमलावरों के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं और पाकिस्तान ने कहा है कि वह इस मामले की जाँच में बिना शर्त सहयोग के लिए तैयार है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्थिति की समीक्षा के लिए ख़ुफ़िया विभागों के प्रमुखों और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की है.
रविवार को उन्होंने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई.
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में मुंबई हमलों से उपजे हालात की समीक्षा के लिए कैबिनेट की बैठक हुई.
इस बीच चरमपंथियों का निशाना बने आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, और एनएसजी में मेजर रैंक के अधिकारी संदीप उन्नीकृष्णन का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
दहशत और हताशा
रविवार को सुबह बीबीसी संवाददाता सुशील कुमार झा ने ताज होटल, नरीमन हाउस और होटल ऑबरॉय का दौरा किया.
उनका कहना था कि नरीमन हाउस का रास्ता पुलिस ने सुबह सील कर रखा था लेकिन बाद में इसे खोल दिया गया. सुबह उसके आसपास वही लोग दिखाई पड़ रहे थे जो वहाँ रहते हैं. बाक़ी लोग उस ओर जाने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे.
शुक्रवार को जहाँ सेना के जवान और कमांडो ही दिखाई दे रहे थे वहाँ अब सिर्फ़ मुंबई पुलिस के जवान थे.
इसी तरह होटल ऑबरॉय में भी आम लोग दिखाई नहीं पड़े. होटल के भीतर सुरक्षाकर्मी ही दिखाई दिए. लेकिन वहाँ मीडियाकर्मियों की अच्छी ख़ासी संख्या थी.
होटल ताज का नज़ारा इन दोनों जगहों से थोड़ा अलग था. वहाँ लोग जमा होते जा रहे थे. तीन दिनों तक टेलीविज़न स्क्रीन पर जो तस्वीरें लोगों ने देखीं वो लोग अब अपने शहर की इस ऐतिहासिक इमारत को ख़ुद अपनी आँखों से देखना चाहते हैं.
ताज होटल में अब मुंबई पुलिस और आरएएफ़ के जवान ही दिखाई दे रहे हैं हालांकि अब गहमागहमी वैसी नहीं है जैसी पिछले तीन दिनों से थी.
पास ही मरीन ड्राइव है जहाँ लोगों की ख़ासी भीड़ दिखाई देती है लेकिन रविवार को वहाँ इतने कम लोग दिखाई पड़े कि लोगों में दहशत और डर को साफ़ देखा जा सकता था.
लोग अभी भी मीडिया से बात करने और कैमरे के सामने आने के लिए आसानी से तैयार नहीं हो रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के मुताबिक़ लोग आमतौर पर सिनेमा हॉल और रेस्तराँ जैसी भीड़ वाली जगह पर जाना टाल रहे हैं.
उनका कहना है कि रविवार होने के कारण लोग कम बाहर निकले हैं लेकिन रोज़ी रोटी ने बहुत से लोगों को निकलने पर मजबूर किया है.
जाँच और सफ़ाई
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने रविवार को सुबह होटल ऑबरॉय, नरीमन हाउस और ताज होटल का दौरा किया.
इन तीनों ही जगहों को सुरक्षाकर्मियों ने घेर रखा है और वहाँ चरमपंथी हमलों के बाद सबूत जुटाने और संभावित हथियार और विस्फोटकों की जाँच चल रही है.
तीनों की जगहों से मलबे की सफ़ाई का काम भी साथ चल रहा है. हमलों के बाद तीनों की जगह भारी तबाही साफ़ दिख रही है.
ताज होटल में तो बड़ा हिस्सा जला दिया गया है और जगह-जगह ख़ून बिखरा हुआ दिख रहा है. काँच के टुकड़े वहाँ मची तबाही का मंज़र बयान कर रहे है.
ऑबरॉय के भीतर भी बड़ी तोड़फोड़ हुई है और गोलियों के निशान दिख रहे हैं. सुरक्षाबल यह कहने की स्थित में नहीं है कि इस जाँच में अभी कितना वक़्त और लगेगा.