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रविवार, 30 नवंबर, 2008 को 20:04 GMT तक के समाचार

संघीय जाँच एजेंसी गठित की जाएगी

मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों से उपजे हालात की समीक्षा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होकर कार्रवाई करने का संकल्प लिया गया. इसमें संघीय जाँच एजेंसी बनाने, केंद्र-राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने, क़ानूनी ढाँचा और ख़ुफ़िया एजेंसियों को मज़बूत बनाने पर सहमति बनी.

साथ ही हवाई और समुद्री सीमा की सुरक्षा बढ़ाने पर भी सहमति बनी.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुरु में ही बैठक को संबोधित करते हुए संघीय जाँच एजेंसी गठित करने की घोषणा कर दी थी.

रविवार को लगभग पाँच घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से कहा, "हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ पूरे संकल्प के साथ कार्रवाई करेंगे और इसमें हमारे पास उपलब्ध सभी संसाधनों और उपायों का इस्तेमाल किया जाएगा."

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के ख़तरे से निपटने के लिए नए ढाँचे बनाए जाएंगे जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय पर ज़ोर होगा.

विदेश मंत्री के मुताबिक बैठक में राज्यों में भी नेशनल सेक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) की तर्ज पर प्रशिक्षित कमांडो दस्ता तैयार करने पर सहमति बनी है.

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित संघीय जाँच एजेंसी एक निर्धारित समयसीमा के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपेगी.

बैठक में ख़ुफ़िया विभागों के क्रियाकलाप की आलोचना हुई. विदेश मंत्री का कहना था, "हम ऐसी व्यवस्था करेंगे ताकि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ पुख़्ता जानकारी दें जिसके आधार पर पहले से कोई एहतियाती कार्रवाई संभव हो सके."

तेलुगुदेशम पार्टी के नेता येरन नायडू ने बताया कि बैठक में संयुक्त राष्ट के ज़रिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने का मुद्दा उठाया गया.

'चार एनएसजी केंद्र, संघीय जाँच एजेंसी का गठन'

इससे पहले प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार किस तरह से सुरक्षा स्थिति को बेहतर करना चाहती है. उन्होंने दोहराया कि सरकार चरमपंथ का सामना करने के लिए एक संघीय जाँच एजेंसी का गठन करेगी.

बैठक में भाजपा के जसवंत सिंह और विजय कुमार मल्होत्रा, अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, समाजवादी पार्टी के अमर सिंह और मुलायम सिंह, सीपीआई के डी राजा और एबी बर्धन समेत अनेक नेताओं ने भाग लिया. लेकिन विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह इस बैठक में मौजूद नहीं थे.

'सरकार को बने रहने का अधिकार नहीं'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "आतंकवादियों और देश के दुश्मनों को पता होना चाहिए कि उनकी गतिविधियाँ हमे एकजुट करती हैं, अलग-अलग नहीं करती हैं. इस संकट की घड़ी में हमें अपने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर देश के हित के लिए मिलकर काम करना चाहिए. मैं आप सभी के विचार सुनने के लिए उत्सुक हूँ."

मनमोहन सिंह का कहना था, "स्पष्ट है कि बहुत कुछ करने की ज़रूरत है और हम वो सभी कदम उठाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं जिससे संस्थागत बदलाव हों. इनमें नौसेना, कोस्ट गार्ड, कोस्टल पुलिस, वायुसेना और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को शामिल किया जाएगा. देश की आतंकवादी निरोधक फ़ोर्स नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स को और मज़बूत बनाया जाएगा. देश में विभिन्न जगह पर चार एनएसजी सेंटर बनाए जाएँगे."

उनका कहना था, "ये आतंकवादी हमले पिछले हमलों के अलग थे. इनकों प्रशिक्षित और हथियारों से लैस लोगों ने हमारे सबसे बड़े शहर को निशाना बनाया. उनका मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मारना था. उन्होंने देश कि व्यावसायिक राजधानी के कुछ सबसे जाने-माने प्रतीकों को नष्ट करने की कोशिश की."

चरमपंथी त्रासदी के बाद दहशत, हताशा

उनका कहना था कि जिन लोगों के परिजन इन हमलों में मारे गए वे उनका दुख तो कम नहीं कर सकते लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन लोगों के परिवारों का पूरी तरह से ध्यान रखेंगे.