शनिवार, 29 नवंबर, 2008 को 18:21 GMT तक के समाचार
मुंबई में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ 58 घंटों तक चली कमांडो कार्रवाई ताज होटल को मुक्त कराने के साथ ख़त्म हो गई है. ताज में चार चरमपंथी मारे गए हैं.
चरमपंथी हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 195 हो गई है और लगभग 300 लोग घायल हुए हैं. मरने वालों में कम से कम 22 विदेशी नागरिक थे. ये जर्मनी, अमरीका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली, सिंगापुर, थाईलैंड और फ्रांस के थे.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्थिति की समीक्षा के लिए ख़ुफ़िया विभागों के प्रमुखों और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की.
ताज होटल को शनिवार सुबह चरमपंथियों से मुक्त कराने के बाद अब वहाँ तलाशी अभियान चल रहा है.
सुबह तक वहाँ से तीन चरमपंथियों के शव मिले थे लेकिन देर शाम को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी के महानिदेशक जेके दत्त ने बताया कि तलाशी के दौरान एक और चरमपंथी का शव मिला है.
भारत ने आरोप लगाया है कि हमलावरों के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं. इसके जवाब में पाकिस्तान ने कहा है कि अगर मुंबई में हुए हमलों में किसी संगठन की संलिप्तता नज़र आई तो कार्रवाई की जाएगी.
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में मुंबई हमलों से उपजे हालात की समीक्षा के लिए कैबिनेट की बैठक हुई.
इस बीच चरमपंथियों का निशाना बने आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, और एनएसजी में मेजर रैंक के अधिकारी संदीप उन्नीकृष्णन का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.
हमलावरों की संख्या!
दक्षिणी मुंबई के भीड़भाड़ वाले इलाक़ों को निशाना बनाने वाले चरमपंथियों की सही संख्या के बारे में ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है. भारतीय पुलिस के मुताबिक उनकी संख्या दस थी.
पुलिस का कहना है कि एक चरमपंथी ज़िंदा पकड़ा गया है. ख़बरों के मुताबिक इसे छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से पकड़ा गया था.
एक नाव की भी जाँच की जा रही है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि चरमपंथी इसे के सहारे समुद्री रास्ते से मुंबई पहुँचे थे.
भारतीय अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है कि हमलावरों में कुछ ब्रितानी नागरिक थे.
निर्णायक मोर्चा
नरीमन हाउस और होटल ऑबराय को शुक्रवार को ही चरमपंथियों के क़ब्ज़े से मुक्त करा लिया गया था लेकिन ताज होटल में ये कार्रवाई तीसरे दिन तक खिंची.
शनिवार सुबह भारतीय समयानुसार लगभग साढ़े सात बजे कमांडो दस्ते और होटल के निचले तल पर छिपे चरमपंथियों के बीच भीषण गोलीबारी शुरु हुई.
इस दौरान हथगोले फेंके गए और विस्फोटकों का भी इस्तेमाल हुआ. इससे होटल के एक कमरे में आग लग गई और धुँआ उठा. इसी दौरान एक चरमपंथी खिड़की से भागने की कोशिश में मारा गया.
कार्रवाई ख़त्म होने के बाद ताज होटल में टूटी खिड़कियाँ, क्षतिग्रस्त हॉल और जली हुई दीवारें नज़र आ रही हैं.
चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में लगभग 500 कमांडो लगाए गए थे. 400 से ज़्यादा पुलिसकर्मी भी लगे थे.
हालांकि पूरे ऑपरेशन को एनएसजी कमांडो ने ही अंजाम दिया. सेना और पुलिस को बाहर से मदद के लिए ही रखा गया था. एनएसजी ने इस ऑपरेशन को ऑपरेशन ब्लैक टॉरनाडो का नाम दिया था. इस अभियान के दौरान एनएसजी ने दो कमांडो खोए, आठ अधिकारी और कमांडो घायल भी हुए हैं.
एनएसजी कमांडो की कार्रवाई के दौरान ओबेरॉय होटल से 250 लोगों को, ताज होटल से 300 लोगों को और नरीमन हाउस से 12 परिवारों के क़रीब 60 लोगों को रिहा कराया गया.
जहाँ दस जगहों को बुधवार रात को निशाना बनाया गया था, वहीं ताज होटल, ट्राइडेंट-ऑबराय होटल और नरीमन हाउस में चरमपंथियों ने लोगों की बंधक बना लिया था.
'ट्राइडेंट-ऑबराय होटल और नरीमन हाउस मुक्त'
इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो और सुरक्षाकर्मियों ने होटल ओबरॉय-ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस के बारे में दावा किया कि इन्हें चरमपंथियों से मुक्त करवा लिया गया है और वहाँ से सभी बंधकों और फँसे हुए लोगों को छुड़वा लिया गया है.
शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में कुल मिलाकर पाँच चरमपंथियों, एनएसजी के दो जवानों की मौत हुई है और एनएसजी के दो कमांडो घायल हुए.
एनएसजी के महानिदेशक जेके दत्त के अनुसार होटल ओबरॉय-ट्राइडेंट में 30 नागरिक मारे गए जबकि नरीमन हाउस में पाँच लोगों को चरमपंथियों ने मार दिया.
ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल से बंधकों को आख़िरकार शुक्रवार को दोपहर बाद बाहर निकाल लिया गया लेकिन इसके लिए दो दिन से कार्रवाई में लगे सेना और एनएसजी के जवानों ने शुक्रवार को गज़ब की तेज़ी दिखाई.
ओबेरॉय होटल में गोलियों की आवाज़ें दिन में कम हुई तो धीरे धीरे बंधक बाहर आने लगे. बड़ी संख्या में कारों में और बाद में बसों में भर कर बंधकों को बाहर निकाला गया. इनमें भारतीय और विदेशी नागरिक थे.
ऑबरॉय में हुई कार्रवाई के दौरान एनएसजी का एक कमांडो मारा गया है. जबकि यहाँ दो चरमपंथियों के मारे जाने की बात एनएसजी ने कही है. बीबीसी संवाददाता सुशील झा के अनुसार ऑबरॉय-ट्राइडेंट को अभी भी बंद करके रखा गया है और मीडिया को भी वहाँ जाने नहीं दिया जा रहा है.