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पाक तत्वों का हाथ है: प्रणव मुखर्जी

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मुंबई चरमपंथी हमलों में पाकिस्तानी तत्वों का हाथ है.

उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि वह चरमपंथ के ढाँचे को नष्ट करने के अपने वादे को पूरा करे.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो प्रारंभिक सबूत मिले हैं, उनसे नज़र आता है कि मुंबई पर हमला करनेवाले चरमपंथी पाकिस्तान तत्वों से जुड़े हुए हैं.

भारतीय विदेश मंत्री का कहना था कि पाकिस्तान ने दो बार वादा किया था कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों में नहीं किया जाएगा.

उनका कहना था कि 2004 में जब परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे और अटलबिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे, उस दौरान उन्होंने ये वादा किया गया था.

दूसरी बार 24 सितंबर, 2008 को जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से न्यूयॉर्क में मिले तो संयुक्त बयान जारी किया गया था और इसमें भी ये वादा किया गया था.

प्रणव मुखर्जी ने कहा,'' हम पाकिस्तान से अनुरोध कर रहे हैं कि आप अपना वादा पूरा कीजिए और अपने देश में चरमपंथ के ढाँचे को नष्ट कीजिए और जो लोग ऐसी गतिविधियों में लगे हैं, उन्हें गिरफ़्तार कीजिए.''

इसके पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई के हमलों के बारे में कहा था कि ये बहुत ही सुनियोजित और पूरी तैयारी से किया गया हमला था जिसमें विदेशी हाथ भी हो सकता है.

'राजनीति उचित नहीं'

दूसरी ओर भारत दौरे पर आए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अजमेर में पत्रकारों से कहा कि चरमपंथी घटनाओं पर राजनीति नहीं खेली जानी चाहिए.

उनका कहना था कि दोनों देश 'आतंकवाद' की मार झेल रहे हैं इसलिए दोनों देशों को मिलकर इसका सामना करना चाहिए.

इसके पहले शाह महमूद क़ुरैशी ने भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के समक्ष मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों के बीच हॉट लाइन संपर्क बनाए जाने की पेशकश की थी.

उन्होंने मुंबई की घटना पर गहरा शोक जताया था और कहा था कि पाकिस्तान भारत को हरसंभव मदद करने के लिए तैयार है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अपने संदेश में मुंबई हमले की कड़ी निंदा की थी.

राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा था कि क्षेत्र से 'आतंकवाद' और उग्रवाद का ख़ात्मा करने के लिए कड़े क़दम उठाए जाने की आवश्यकता है.