शुक्रवार, 28 नवंबर, 2008 को 12:33 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई से
मधु कपूर ऑबराय होटल में चरमपंथियों के चंगुल से भाग निकलने में सफल रहीं लेकिन उनके पति अशोक कपूर अभी भी होटल में हैं और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.
मधु ने बीबीसी से बात तो की लेकिन तस्वीर खिंचवाने से इनकार कर दिया. वो डरी हुई तो नहीं लगी पर चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं.
उनके पति अशोक 65 वर्ष के हैं और घटना के 35 घंटे बाद भी उन्हें अपने पति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
वो बताती हैं, "मुझे पता नहीं क्या होने वाला है. कुछ भी हो सकता है. हो सकता है वो बंधक हो."
उस रात (बुधवार) की घटना को याद करते हुए मधु कहती हैं कि वो अपने पति के साथ खाना खा रही थीं और अचानक गोलियों की आवाज़ें सुनाई पड़ीं. फिर होटल में घोषणा हुई कि सभी लोग जल्दी बाहर भागें.
पति का पता नहीं
मधु कहती हैं, "मैं भागी और साथ में मेरे पति भी थे. हम लोग नीचे की तरफ़ भागे. बहुत अफ़रा तफ़री थी. जब हम सीढियों पर पहुंचे तो पीछे देख नही पाई.उसके बाद मैंने अपने पति को नहीं देखा."
लेकिन क्या उन्होंने उस चरमपंथी को देखा जिसने लोगों को बंधक बनाया, मधु कहती हैं, "हां हां देखा मैंने उसे और मुझे देखते ही उसने कहा वेट यानी इंतज़ार करो. लेकिन मैं रुकी नहीं भागती रही तो उसने मेरे साथ भाग रहे एक बूढे व्यक्ति को गोली मार दी."
मधु का कहना है कि अधिकारी ठीक काम कर रहे हैं लेकिन समस्या ऐसी है कि कुछ कहना संभव नहीं है.
ऑबराय के कमरों में रहने वाले मेहमानों के बारे में जानकारी मिल रही है लेकिन रेस्तरां में जो थे उनके बारे में जानकारी नहीं मिल रही है.
मधु को बस अब इंतज़ार है अपने पति का या फिर पति के बारे में किसी अच्छी ख़बर का.