शुक्रवार, 28 नवंबर, 2008 को 22:05 GMT तक के समाचार
मुंबई में जारी चरमपंथी हमलों के बीच शनिवार को दिल्ली में विधानसभा के लिए मतदान हो रहा है.
70 सीटों वाली विधानसभा की 69 सीटों के लिए आज चुनाव हो रहा है. एक उम्मीदवार की मौत की वजह से एक सीट पर मतदान स्थगित कर दिया गया है.
दिल्ली में पिछले दस सालों से कांग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित विकास के नाम पर एक बार फिर सत्ता में आने की कोशिश कर रही हैं.
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने महंगाई और चरमपंथ जैसे मुद्दों को लेकर मतदाता से कांग्रेस को हराने की अपील कर रही है. भाजपा ने वरिष्ठ सांसद विजय कुमार मल्होत्रा को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रुप में पेश किया है.
वैसे तो दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुक़ाबला होता रहा है लेकिन माना जा रहा है कि इस बार बहुजन समाज पार्टी दोनों ही दलों के समीकरणों को प्रभावित करेगी.
मतगणना आठ दिसंबर को होगी.
अहम चुनाव
इस बार कुल 863 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला दिल्ली राज्य के एक करोड़ सत्तर हज़ार मतदाता करेंगे.
इनमें युवा मतदाताओं की तादाद चार लाख अट्ठाईस हज़ार है.
69 सीटों पर मतदान सुबह आठ बजे शुरू हो जायेगा और पाँच बजे शाम तक जारी रहेगा.
राजेन्द्र नगर सीट के भाजपा उम्मीदवार की चुनाव अभियान के दौरान मौत हो जाने के कारण यहाँ मतदान अब 13 दिसंबर को होगा.
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के लिए यह चुनाव बहुत अहम् होंगे. क्योंकि वह तीसरी बार कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की आशा कर रही हैं. जबकि विपक्षी भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार वीके मल्होत्रा को उम्मीद है कि कांग्रेस सरकार से नाराज़ जनता भाजपा को नई सरकार बनाने का मौक़ा देगी.
विश्लेषक मान रहे हैं कि पिछले तीन दिन से मुंबई में जारी चरमपंथी हमलों का असर भी चुनाव पर पड़ सकता है.
एक तो भाजपा ने पहले से ही चरमपंथ को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था और बुधवार की रात से लगातार जारी चरमपंथी गतिविधियों के बाद गुरुवार के अखबारों में पार्टी ने ऐसे विज्ञापन भी छपवाए हैं जिनमें ताज़ा चरमपंथी हमलों का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस को कोसा गया है.
दूसरी ओर विश्लेषकों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस को दिल्ली में नुकसान पहुँचा सकती है.
पिछले हफ्ते कांग्रेस की ओर से पार्टी प्रमुख सोनिया गाँधी और महासचिव राहुल गाँधी जैसे लोगों ने दिल्ली के विकास की ढोल बजाकर प्रचार किया तो भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं ने चरमपंथ को लेकर कांग्रेस को एक कमज़ोर पार्टी बताने का प्रयास किया.