गुरुवार, 27 नवंबर, 2008 को 04:41 GMT तक के समाचार
रफ़ीक़ गुलाम हुसैन
विजय सालस्कर के ड्राइवर
(मुंबई में चरमपंथियों से मुठभेड़ में मारे गए पुलिस अधिकारियों में जाने माने एनकाउंटर विशेषज्ञ इंस्पेक्टर विजय सालस्कर भी शामिल हैं. उनके ड्राइवर रफ़ीक मुठभेड़ के बारे में बता रहे हैं.)
मैं ख़िलाफ़त मार्केट में विजय सालस्कर साहब से मिलने गया था. लेकिन मेरी उनसे मुलाक़ात नहीं हुई.
उसी समय विक्टोरिया टर्मिनस से गोला बारुद, फ़ायरिंग की आवाज़ आ रही थी. सब तरफ़ दहशत और भय का माहौल था. लोग इधर-उधर भाग रहे थे.
पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुँचने लगी. दोनों तरफ़ से गोलियाँ चली.
हमले के समय सालस्कर साहब ने चरमपंथियों का डटकर मुक़ाबला किया. लेकिन फ़ायरिंग में सलास्कर साहब ज़ख्मी हो गए.
बहुत लोगों को बचा कर सालस्कर साहब ने हिंदुस्तान को, भारत माता को अपना जीवन दे दिया.
साहब ने मुझे दो बार ज़िदगी दी थी. पहले मुंबई में जब मुझ पर हमला हुआ था तब तीन गोलियाँ लगी थी. मुझे सालस्कर साहब ने ही बचाया था.
सालस्कर साहब ने ग़रीबों के लिए अपना जीवन दे दिया.