शनिवार, 22 नवंबर, 2008 को 09:13 GMT तक के समाचार
भारत में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे देशभर में तेज़ी से पैर पसार रहे आतंकवाद से निपटने के लिए विशेष बलों का गठन करें.
दिल्ली में राज्यों के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय बैठक की शुरुआत करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि विशेष बल इस समय की ज़रुरत हैं.
शिवराज पाटिल ने दोहराया है कि 'पोटा' जैसा कोई सख़्त क़ानून लागू किए जाने की कोई संभावना नहीं है.
केंद्र सरकार मानती आई है कि देश में मौजूदा क़ानून आतंकवाद से निपटने के लिए पर्याप्त है.
इसके अलावा शिवराज पाटिल ने राज्य के पुलिस अधिकारियों को मीडिया को जानकारी देते हुए सावधानी बरतने की भी सलाह दी है.
आधुनिकीकरण
शिवराज पाटिल ने राज्य के पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए इस बात पर चिंता ज़ाहिर की कि बहुत से राज्य पुलिस आधुनिकीकरण के लिए दी जाने वाली राशि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अगर राज्य पुलिस एक साल इस राशि का उपयोग नहीं कर पाती है तो केंद्र के लिए अगले साल इस मद में पैसा देना कठिन होता है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई राज्य पुलिस आधुनिकीकरण के पैसे को खर्च नहीं कर रही है तो पैसे की कमी से उन राज्यों को तकलीफ़ नहीं होने दी जाएगी जो इसका उपयोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अब से पैसे ख़र्च न कर रहे राज्यों को एक या दो बार नोटिस भेजने के बाद यह राशि दूसरे राज्यों को दे दी जाएगी."
मीडिया की भूमिका के बारे में शिवराज पाटिल ने कहा कि कई बार मीडिया की भूमिका सहयोगी होती है लेकिन कई बार इससे समस्याएँ भी पैदा होती हैं.
उन्होंने कहा, "जब मीडिया के पास कोई जानकारी हो और वह सूचना सही भी हो तो कोशिश करनी चाहिए कि उसका उपयोग किया जाना चाहिए."
पुलिस को मीडिया से अनावश्यक बात न करने की सलाह देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जब तक कोई सूचना देना बहुत आवश्यक न हो पुलिस को मीडिया से बात नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "यदि किसी मामले में पुलिस अदालत में कोई जानकारी देती है और वह मीडिया तक पहुँच जाती है तो इसमें पुलिस का दोष नहीं है लेकिन वो जानकारी मीडिया को नहीं मिलनी चाहिए जिसकी जाँच अभी पूरी नहीं हुई है."
अहम बैठक
देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों की बैठक ख़ुफ़िया ब्यूरो (आईबी) ने बुलाई है.
शनिवार से शुरु हुई इस बैठक में अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक में चरमपंथियों और कट्टरपंथी गुटों से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने की कोशिश की जाएगी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस बैठक के आयोजन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक में कट्टरपंथी गुटों, इनमें से कुछ गुटों के विदेशी ताक़तों के साथ कथित संबंध, ख़ुफ़िया तंत्र को मज़बूत बनाने के उपायों एक के बाद एक बम विस्फोट से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी.
संभावना है कि इस बैठक में मालेगाँव विस्फोट के सिलसिले में चल रही जाँच, उड़ीसा और कर्नाटक में चर्चों और ईसाई संगठनों पर हमले का मामला भी चर्चा में आएगा.
इस सम्मेलन का समापन रविवार को होगा और इसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी संबोधित करेंगे.