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शुक्रवार, 21 नवंबर, 2008 को 07:00 GMT तक के समाचार

सोनिया ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण को सराहा

संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वैश्विक वित्तीय संकट के संदर्भ में औद्योगिक जगत की सफलता और समाज के ग़रीब वर्ग के प्रति ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने पर ज़ोर दिया है.

अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, "इस समय (आर्थिक संकट के दौरान) हमारी प्रतिक्रिया संतुलित होनी चाहिए. हमें अर्थव्यवस्था के नियंत्रण के दौर में वापस जाने की ज़रूरत नहीं है."

भारत मंदी से निपटने में सक्षम

वर्तमान वित्तीय संकट के समय सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चार दशक पहले के निजी बैंकों के राष्ट्रीयकरण के फ़ैसले को याद किया.

'बैंकों के राष्ट्रीयकरण को याद करें'

सोनिया गांधी का कहना था, "इंदिरा गांधी के बैंकों के राष्ट्रीयकरण को याद कीजिए जिसकी कड़ी आलोचना भी हुई. आज हर दिन उस फ़ैसले की समझदारी का सबूत मिल रहा है. बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता दी...आज क्या होता यदि बैंकों का राष्ट्रीयकरण न हुआ होता...लेकिन हम किसी के (निजी क्षेत्र के) हाथ बाँधना नहीं चाहते..."

यूपीए अध्यक्ष का कहना था, "प्रधानमंत्री के काबिल नेतृत्व में उनके दिखाए रास्ते को हम छोड़ नहीं रहे लेकिन इस समय हमें आर्थिक संकट के तूफ़ान का सामना भी करना है."

सोनिया गांधी ने निजी बैंकों और बड़ी कंपनियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्या थोड़े से लोगों को बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किलों में धकलने का अधिकार होना चाहिए?

उनका कहना था कि आज भारतीय उद्योग जगत अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है लेकिन उसे ये भूलना नहीं चाहिए कि उसकी सफलता के साथ-साथ उन करोड़ों लोगों के कल्याण का भी ध्यान रखना चाहिए जो रोटी और छत के लिए जूझ रहे हैं.

छोटे उद्योगों और सरकारी क्षेत्र की बात करते हुए सोनिया गांधी का कहना था कि सरकारी क्षेत्र को और कुशलता से काम करना होगा और पूरे देश को सहयोग करते हुए आगे बढ़ना होगा.