गुरुवार, 20 नवंबर, 2008 को 03:02 GMT तक के समाचार
छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण का मतदान पूरा हो गया है, 65 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.
इस चरण में विधानसभा की 90 में से 51 सीटों पर मतदान हुआ. 39 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान 14 नवंबर को हो चुका है. मतगणना आठ दिसंबर को होनी है.
मतदान की पूर्व संध्या पर नक्सल प्रभावित इलाक़ों से हिंसा की कुछ ख़बरें मिली थीं.
चुनाव आयोग ने इस चरण में भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे हालांकि इस चरण में नक्सली हिंसा की चुनौती वैसी नहीं है जैसी कि पहले चरण में दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाक़े में थी.
इस चरण में जो उम्मीदवार क़िस्मत आज़मा रहे हैं उनमें पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी और उनकी पत्नी रेणु जोगी भी हैं.
इसी चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू और कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय और दिलीप सिंह जूदेव के बेटे युद्धवीर सिंह भी मैदान में हैं.
इसके अलावा गृहमंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल, पूर्व गृहमंत्री नंदकुमार पटेल और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष नोबेल वर्मा की हार-जीत का फ़ैसला भी इसी चरण के मतदान से होगा.
तेज़ी से मतदान
सुबह आठ बजे मतदान शुरु हुआ तो लोग मतदान केंद्रों पर मानों उमड़ पड़े. ख़बरें हैं कि कई मतदान केंद्रों पर तो शुरुआती दो घंटों में 15 से 20 प्रतिशत तक मतदान हो चुका था.
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपने चुनाव क्षेत्र मरवाही में मतदान किया है और इसके बाद जब वे क्षेत्र के दौरे पर निकले तो ग्राम गिरवर के पास दोपहर कोई बारह बजे कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई.
पुलिस के अनुसार इसके बाद अजीत जोगी के काफ़िले पर पथराव किया गया है.
इसके अलावा कई मतदान केंद्रों से सुरक्षाकर्मियों के साथ मतदाताओं की झड़पों की ख़बरें हैं.
कई मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के ख़राब होने की शिकायतें भी मिली हैं.
हिंसा की ख़बरें
इस चरण में जिन ज़िलों में मतदान हो रहे हैं उनमें से कई ज़िले नक्सली प्रभावित माने जाते हैं. झारखंड से लगे सरगुज़ा ज़िले में नक्सलियों या माओवादियों का प्रभाव बहुत पुराना माना जाता है.
इन इलाक़ों में भी नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का नारा दे रखा है और इसकी वजह से कई जगह मतदाता डरे हुए हैं.
राज्य के गृहमंत्री रामविचार नेताम इसी सरगुजा के रामानुजगंज से चुनाव लड़ रहे हैं.
रामानुजगंज में ही बुधवार को नक्सलियों ने बारुदी सुरंग लगाकर पुलिस की एक जीप को उड़ा दिया था जिसमें एक डीएसपी सहित पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.
अहम चरण
इस चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ की कुल 15 आदिवासी यानी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव होने हैं जबकि छह सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं और 30 सीटें सामान्य हैं.
पिछली बार आदिवासी सीटों पर भाजपा को मिली जीत के कारण ही वह सरकार बनाने में सफल हुई थी.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन चुनावों में यदि कुछ आदिवासी सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज कर पाती है तो इससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.
कांग्रेस ने इन 51 सीटों में से तीन सीटें अपने राजनीतिक सहयोगी एनसीपी के लिए छोड़ दी हैं जबकि भाजपा और बसपा ने सभी 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
इस चरण के चुनाव क्षेत्रों में ही बसपा का बड़ा प्रभाव माना जाता रहा है और माना जा रहा है कि कई सीटों पर बसपा चुनाव नतीजों को प्रभावित करेगी.
इन चुनावों में भाजपा ने जहाँ विकास के अलावा ग़रीबों को तीन रुपए किलो चावल देने जैसे मुद्दे उठाए हैं वहीं कांग्रेस ने विकास कार्यो में भ्रष्टाचार को उछाला है और सरकार बनने पर दो रुपए किलो चावल देने का वादा किया है.