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गुरुवार, 13 नवंबर, 2008 को 12:14 GMT तक के समाचार

'जल्द हो मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौता'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया भार में छाई आर्थिक मंदी को देखते हुए 'बिमस्टेक' के देशों से मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौता जल्द करने की ज़रूरत बताई है.

वह गुरुवार को नई दिल्ली में बंगाल की खाड़ी से लगे देशों के संगठन 'बिमस्टेक' के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा, "हमें व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में कुछ ऐसा करना चाहिए जो दिखाई दे."

उन्होंने कहा कि बिमस्टेक के मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है. इसके शुरुआती नतीजे इसके सदस्य देशों के लिए शानदार उदाहरण हो सकते हैं.

ज़रूरत

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें निवेश और सेवा के क्षेत्र में इस समझौते के अगले चरण के बारे में भी सोचना चाहिए."

दुनिया की 20 फ़ीसदी आबादी 'बिमस्टेक' देशों में रहती है. पिछले 10 साल में इन देशों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ढाई गुना बढ़ कर 17 खरब डॉलर हो गया है.

'बिमस्टेक' के देशों का यह दूसरा शिखर सम्मेलन है. यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में आर्थिक संकट छाया हुआ है.

इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, अंतर्देशीय अपराध से निपटने, 'बिमस्टेक' ऊर्जा केंद्र, मैसम और जलवायु केंद्र को भारत में खोलने जैसे कुल 13 मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा.

इसमें श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमाल दहाल यानी प्रचंड, बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार फ़ख़रुद्दीन अहमद, बर्मा के प्रधानमंत्री तिन सेन, भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मी वाई थिनले और थाईलैंड के प्रधानमंत्री सोमचाई वोंगसवाट भाग ले रहे हैं.

सम्मेलन में मुक्त व्यापार पर विस्तार से चर्चा हुई. संगठन के सदस्य देशों ने माना कि आर्थिक क्षेत्र में सहयोग इस संगठन का सबसे बड़ा क़दम होगा.

सम्मेलन में भारत और श्रीलंका समेत कई अन्य देशों ने आतंकवाद पर भी चर्चा की.

बर्मा को 'बिमस्टेक' देशों का अगला अध्यक्ष चुना गया है. इसका कई मानवाधिकार संगठन विरोध कर रहे हैं.

उनका कहना है कि इस तरह से ये देश बर्मा की सैनिक सरकार को मान्यता दे रहे हैं.