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बुधवार, 12 नवंबर, 2008 को 08:23 GMT तक के समाचार

'हिंदू नेताओं पर साधा जा रहा है निशाना'

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि बम धमाकों के मामलों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार बग़ैर सबूतों के हिंदू धार्मिक नेताओं को निशाना बना रही है.

साथ ही भाजपा ने खुल कर गोरखपुर से पार्टी के सांसद योगी आदित्यनाथ का भी बचाव किया है.

भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बुधवार को रायपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, " मालेगांव बम धमाकों के मामले में योगी अदित्यनाथ का नाम आना जांच का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके राजनीतिक कारण हैं."

ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि मालेगांव धमाकों के मामले में महाराष्ट्र का आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) उत्तर प्रदेश के 'एक महत्वपूर्ण नेता' से पूछताछ की तैयारी में है.

योगी आदित्यनाथ ने भी मंगलवार को कांग्रेस पर हिंदूवादी संगठनों को बदनाम करने का आरोप लगाया है.

'राजनीतिक कारण'

राजनाथ सिंह ने कहा, " पर्याप्त सबूत के बिना सरकार हिंदू धार्मिक नेताओं और आश्रमों को निशाना बना रही है. सरकार की कार्रवाइयों संदिग्ध हैं."

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी भी तरह की जांच के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन पार्टी धार्मिक नेताओं के विरुद्ध 'विकृत प्रचार' की विरोधी है.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, " हिंदू आतंकवाद जैसे शब्दों के प्रयोग की राजनीतिक वजह हैं और ये सोच से परे हैं कि यागी अदित्यनाथ किसी हिंसात्मक गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं."

उनके अनुसार भाजपा के सांसद का नाम धमाकों से जोड़ना दरअसल 'गोरखपीठ' को बदनाम करने की साज़िश है जोकि करोड़ों लोगों में सम्मान के भाव से देखा जाता है.

राजनाथ सिंह का कहना था कि सरकार 'आतंकवाद' के मामले में दुविधा का शिकार है. वो आतंकवाद और मुस्लिम समुदाय को अलग-अलग करके नहीं देख सकती है.

उनका ये भी कहना था कि पुख़्ता सबूतों के बिना धमाकों के मामलों में सेना को जोड़ने से उसका मनोबल गिरेगा.

जूना अखाड़े की सफ़ाई

दूसरी ओर जूना अखाड़े के स्वामी अवधेशांनद ने भी कहा है कि राजनीतिक वजह से मालेगांव धमाकों के मामले में उनके अखाड़े का नाम लिया जा रहा है.

ऐसी ख़बरें है कि वो मालेगांव बम धमाकों को मामले में गिरफ़्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के गुरू रहे हैं और उनसे भी पूछताछ की जा सकती है.

अवधेशानंद ने कहा, " मैं जांच के ख़िलाफ़ नहीं और जांच की प्रक्रिया में सहयोग दूंगा."

उन्होंने संवाददाताओं के सवालों का उत्तर देते हुए कहा, " सभी पंत, समप्रदायों के लोग इस अखाड़े में दीक्षा लेते हैं और इनकी संख्या लगभग पांच लाख तक होती है ऐसे में सभी पर नज़र रखना मुमकिन नहीं है और अखाड़े से निकल जाने के बाद मेरी कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती."