मंगलवार, 11 नवंबर, 2008 को 19:33 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्य प्रदेश में जहां पर्यटन मंत्री तुकोजी राव पवार को न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है वहीं उच्च न्यायालय ने राजस्व मंत्री कमल पटेल के पुत्र का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है.
राज्य में चुनाव प्रक्रिया जारी है और इसी बीच पवार को चुनाव अधिकारी के ख़िलाफ़ चुनाव अधिकारी को धमकाने का मामला दर्ज़ किया गया था.
पवार न्यायिक हिरासत में हैं लेकिन न तो उन्हें मंत्री पद से बर्ख़ास्त किया गया है और न ही उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है.
राजस्व मंत्री कमल पटेल के पुत्र सुदीप पटेल अन्य लोगों के साथ एक गोलीकांड, हत्या और सुबूत मिटाने के मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद पिछले महीने केस दर्ज किया था.
नौ महीने इस पुराने मामले में अदालत के आदेश के पहले कार्यवाही न करने की वजह से मध्य प्रदेश पुलिस पर कई तरह के आरोप पहले ही लगते रहे थे अब कोर्ट के आदेश को उसकी निष्पक्षता पर लगे प्रश्नचिन्ह के तौर पर पेश किया जा रहा है.
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल को एक पत्र लिखकर दोनों मंत्रियों के खिलाफ कारवाई की मांग की थी.
पार्टी प्रवक्ता जेपी धनोपिया ने कहा कि राज्यपाल को अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए तुकोजीराव पवार को मंत्री पद से बर्खास्त करना चाहिए.
पर्यटन मंत्री तुकोजीराव पंवार की सुबह हुई गिरफ्तारी और उसके बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है की क्या जेल में बंद एक मंत्री को पद से नहीं हटाया जाना चाहिए?
हालाँकि राज्य में पन्द्रह दिन बाद होने वाले चुनाव की प्रक्रिया जारी है और सरकार कोई नया फैसला नहीं ले सकती लेकिन मंत्रियों को कई प्रकार की रोज़मर्रा के विभागीय कामों का निर्वहन करने की ज़रूरत आन पड़ सकती है.
सरकार और भारतीय जनता पार्टी इस मामले में बिल्कुल खामोश है.
एक प्रशासनिक सूत्र का कहना कि इस मामले में तो मंत्री तुकोजीराव पवार को ख़ुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था तब खासतौर पर जब वह ज़मानत की अर्जी न देकर एक राजनीतिक स्टेटमेंट देने की कोशिश कर रहे हैं; उनका ऐसा न करना मुख्य मंत्री के लिए राजनितिक परेशानी खड़ी कर सकता है.
मगर मंत्री को ऐसे समय जब चुनाव आयोग की पैनी नज़र उस ओर है किसी प्रकार की विशेष सुविधा मिल पाने या दे पाने का कोई सवाल ही नहीं.
चुनाव आयोग के आदेश पर एक निर्वाचन अधिकारी के काम में बाधा डालने और उसे धमकाने का केस दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने आज सुबह तुकोजीराव पंवार को देवास सीमा पर गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया जहाँ पर्यटन मंत्री ने ज़मानत लेने से मना कर दिया और फिर अदालत ने उन्हें २४ नवंबर तक के न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
पर्यटन मंत्री के साथ भारतीय जनता पार्टी के सोनकच्छ सीट से उम्मीदवार और पार्टी के पूर्व सांसद फूलचंद वर्मा को भी तेरह दिनों के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
अक्सर विवादों में रहने वाले तुकोजीराव पवार पर निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर में घुसकर पहले भाजपा उम्मीदवार का नामांकन दाखिल करने की मांग करने और उसके लिए मना करने पर महिला अधिकारी के साथ बदसलूकी और धमकी देने का आरोप है.
पर्यटन मंत्री का आरोप था कि निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा आधे अधूरे दस्तावेज़ देने के बाद भी उनका नामांकन रद्द नहीं किया.
प्रशासन के पास इस पूरे मामले की रिकार्डिंग मौजूद थी जो उसने कल निर्वाचन आयोग को भेजी थी जिसने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए.
देवास कलेक्टर को इस मामले को उसके सामने पहले न लाने की सज़ा के तौर पर ट्रांसफर किया और उनके खिलाफ विभागीय करवाई के आदेश दिए.
साथ ही दबाव के बावजूद अपनी ड्यूटी ठीक तरह से करने के लिए निर्वाचन अधिकारी को प्रशंसा पत्र जारी किया.