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मंगलवार, 11 नवंबर, 2008 को 12:52 GMT तक के समाचार

'अल्वा ने पार्टी का अनुशासन भंग किया'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा है कि विवाद में घिरीं कांग्रेस महासचिव मार्गरेट अल्वा ने पार्टी के अनुशासन को भंग किया है और ऐसा कांग्रेस पार्टी में बर्दाश्त नहीं किया जाता है.

कांग्रेस की अनुशासनिक समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने मीडिया को बताया, "पार्टी के नेता का क़द कितना भी बड़ा या छोटा हो, सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है और ये कांग्रेस में बर्दाश्त नहीं होता. कांग्रेस पार्टी की नज़र में सभी बराबर हैं."

इससे पहले कांग्रेस नेता और पार्टी की अनेक राज्यों की प्रभारी मार्गरेट अल्वा ने कर्नाटक में पार्टी टिकेट बेचे जाने का आरोप लगाया था. हालाँकि, पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था.

इसके बाद अल्वा विवादों से घिर गईं और ख़बरें हैं कि उन्होंने कांग्रेस महासचिव के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. वे सोमवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी मिली थीं.

कांग्रेस पार्टी ने इस्तीफ़े के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

अनुशासनात्मक कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि मार्गरेट अल्वा के कर्नाटक के बारे में लगाए आरोपों के बाद उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई थी.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मार्गरेट अल्वा अपने बेटे को टिकट नहीं दिए जाने को लेकर नाराज़ हैं और उन्होंने तो पूर्व केंद्रीय मंत्री सीके जाफ़र शरीफ़ के पोते को टिकट न दिए जाने पर भी एतराज़ जताया है.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के बँटवारे को लेकर 'अलग मापदंड' अपना रही है.

हालांकि अल्वा के समर्थन में गुजरात के दलित नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री योगेंद्र मकवाना सामने आ गए थे.

अनसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रमुख मकवाना का कहना था कि मार्गरेट अल्वा ने जो कहा है, उसकी जाँच कराई जानी चाहिए.

समाचार माध्यमों के अनुसार वीरप्पा मोइली ने पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दी है.

लेकिन कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर मार्गरेट अल्वा के आरोपों को ठुकरा दिया है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "कांग्रेस पार्टी ऐसे बयानों से सहमत नहीं है. ऐसी शिकायतों को सार्वजनिक रूप से नहीं व्यक्त करना चाहिए."