सोमवार, 10 नवंबर, 2008 को 13:36 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर के प्रमुख अलगाववादी नेता और सर्वदलीय हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि वे कश्मीर में होने वाले चुनाव में चुनाव अधिकारी की भूमिका ना निभाएँ.
भारत प्रशासित कश्मीर में सात चरणों में होने वाले चुनाव के पहले चरण में मतदान 17 नवंबर को होंगे.
उमर फ़ारूक़ ने अधिकारियों से अपील की, "थोड़ी लालच में पड़ कर अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ को ना भूलें."
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को चाहिए कि वे आम लोगों के संघर्ष में सहायता पहुँचाए और चुनाव से दूर रहें.
उमर फ़ारुक़ ने चुनाव के दिन घाटी में पूरी तरह से बंद का आह्वान किया है. वे शुक्रवार को बांदीपुरा में चुनाव के विरोध में एक रैली का आयोजन करेंगे. वहाँ 17 नवंबर को मतदान होने वाला है.
कश्मीर विवाद और चुनाव
उन्होंने चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियों की इस बात को ख़ारिज किया है कि कश्मीर विवाद और चुनाव दोनों अलग-अलग मसले हैं.
उमर ने कश्मीरी पंडितों से भी अपील की है कि वे भी चुनाव का बहिष्कार करें.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आँखों में धूल झोंकने के लिए कश्मीर में चुनाव को आत्मनिर्णय के बदले की तरह पेश कर रही है.
उधर भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी नज़ीर अहमद पारे ने बताया कि चुनाव आयोग ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि यदि किसी कारणवश स्थानीय लोग चुनाव अधिकारी के रुप में ड्यूटी पर नहीं आ पाएँ तो वे उससे निपट सके.
उन्होंने कहा कि पहले चरण के मतदान से पहले 500 चुनाव अधिकारी बाहर के राज्यों से भारत प्रशासित कश्मीर पहुँचेंगे.
चुनाव आयोग ने राज्य में प्रत्येक चुनावी अधिकारी को 10 हज़ार रुपए देने का निर्णय किया है.