शनिवार, 01 नवंबर, 2008 को 19:38 GMT तक के समाचार
दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के फ़िल्म कलाकारों ने श्रीलंका में तमिलों के लगातार मारे जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए एक दिन का उपवास रखा.
चेन्नई में हुए इस विरोध प्रदर्शन के लिए एक बड़ा मंच तैयार किया गया था और इसमें शामिल हुए लगभग सभी कलाकारों ने काले कपड़े पहन रखे थे.
इस विरोध प्रदर्शन में रजनीकांत, कमलहासन से लेकर अजीत कुमार और शरत कुमार तक कई बड़े-छोटे कलाकारों ने हिस्सा लिया.
उनकी माँग है कि श्रीलंका में तमिलों के ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई को तुरंत रोका जाना चाहिए और वहाँ शांति स्थापित होना चाहिए और विस्थापित हुए तमिलों की सहायता की जानी चाहिए.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि की अपील पर इन कलाकारों ने श्रीलंका के तमिलों के लिए तैयार राहत कोष में लगभग 50 लाख रुपयों का दान भी दिया है.
इससे पहले इन कलाकारों ने 19 अक्तूबर को रामेश्वरम में एक रैली निकाली थी.
संवेदनशील मुद्दा
श्रीलंका के तमिलों का मुद्दा तमिलनाडु में राजनीतिक और सामाजिक रुप से संवेदनशील मुद्दा माना जाता है.
थोड़े दिन पहले वहाँ सत्तारूढ़ डीएमके और सहयोगी पार्टियों के सांसदों ने केंद्र की यूपीए सरकार से श्रीलंका सरकार पर कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाने की माँग की थी.
इसके लिए उन्होंने सभी तमिल सांसदों के इस्तीफ़े की घोषणा की थी.
इसके बाद केंद्र सरकार ने श्रीलंका सरकार से तमिलों की हितरक्षा की अपील की थी. हालांकि सरकार ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप से यह कहकर इनकार कर दिया था कि यह किसी भी देश की संप्रभुता का मामला है.
तमिल कलाकारों ने भी श्रीलंकाई तमिलों के प्रति एकजुटता दिखान के लिए शनिवार को यह आयोजन किया था.
दक्षिण भारत के आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष और राजनीतिज्ञ कलाकार आर शरत कुमार ने बीबीसी से हुई बातचीत में अपनी माँगों का ब्यौरा दिया.
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि श्रीलंका में तमिलों के ख़िलाफ़ सेना की कार्रवाई तुरंत बंद होनी चाहिए और वहाँ पहले शांति की स्थापना होनी चाहिए."
उनका कहना था कि नॉर्वे में में जो शांतिवार्ता होने जा रही है उसमें तमिलानाडु के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए.
श्रीलंका में चल रहे संघर्ष के कारण विस्थापित हुए तमिलों की परेशानियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए राहत का तुरंत इंतज़ाम किया जाना चाहिए.
फ़िल्म कलाकारों के उपवास की वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे की ओर लोगों का ध्यान गया है.
उल्लेखनीय है कि श्रीलंका में सरकार पिछले कुछ महीनों से देश के उत्तरी हिस्से में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ तेज़ कार्रवाई कर रही है और उसका दावा है कि अब लड़ाई 'अंतिम चरण' में है.
इस संघर्ष के चलते लाखों तमिलों को विस्थापित होना पड़ा है और संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियों को अपना काम रोककर वहाँ से हटना पड़ा है.