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शनिवार, 01 नवंबर, 2008 को 03:01 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, पूर्वोत्तर भारत

धमाकों की गुत्थी अनसुलझी, प्रधानमंत्री असम दौरे पर

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जाँच शुरू हो गई है पर अभी तक इस बात से पर्दा नहीं उठ पा रहा है कि हमले के पीछे किस अलगाववादी या चरमपंथी संगठन का हाथ है.

पुलिस और खुफ़िया विभाग का कहना है कि इसके पीछे असम में सक्रिय अलगाववादी संगठन, अल्फ़ा का हाथ है. अल्फ़ा इससे साफ़ इनकार करता है.

एक नए संगठन, इस्लामिक सिक्योरिटी फ़ोर्स (आईएसएफ़) का नाम सामने आया है जो इन धमाकों की ज़िम्मेदारी ले रहा है पर पुलिस और ख़ुफ़िया विभाग इस तरह के किसी संगठन की जानकारी से इनकार कर रहा है.

इस बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी धमाकों के बाद हालात का जायज़ा लेने के लिए शनिवार को असम दौरे पर जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि उनके साथ यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के भी असम पहुँचने की संभावना है.

गुरुवार को असम में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. इन धमाकों में अबतक 76 लोगों की मौत हो चुकी है. डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग इन धमाकों में घायल हो गए हैं.

फ़ॉरेंसिक विशेषज्ञ मलबे से धमाकों के सूत्र की तलाश में जुटे हैं. पुलिस अधिकारी और गृह मंत्रालय फिलहाल कुछ भी साफ़ तौर पर कह पाने की स्थिति में नहीं हैं.


धमाकों से दहला असम

उत्तेजित भीड़ ने वाहनों में आग लगाई

मृतकों की तादाद 76 हुई

असम के धमाके निंदनीय


अनसुलझी गुत्थी

गुरुवार को धमाकों में गुवाहाटी, पश्चिमी शहर कोकराझार और असम के निचले हिस्से के बारपेटा और बोंगाईगाँव इलाकों को निशाना बनाया गया था.

पर धमाकों को दो दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस या प्रशासन के पास इस बात के पुख़्ता सबूत नहीं हैं कि इनके पीछे किस संगठन का हाथ है.

राज्य के एक समाचार चैनल को भेजे गए एक एसएमएस यानी मोबाइल संदेश में किसी नवीर अहमद नाम के व्यक्ति ने कहा है कि उसके संगठन, आईएसएफ़ ने इन धमाकों को अंजाम दिया है.

नवीर अहमद ख़ुद को इस कथित इस्लामिक संगठन का प्रवक्ता बता रहे हैं.

पर पुलिस का तर्क है कि राज्य में सक्रिय अलगाववादी संगठन, युनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) के अलावा और कोई ऐसा गुट नहीं है जो इतने बड़े पैमाने पर और इतने सुनियोजित ढंग से धमाके कर सके.

पर पुलिस का कहना है कि अल्फ़ा अपने ऊपर आ रहे इल्ज़ाम से बचने के लिए अब इस्लामिक संगठन के नाम का सहारा ले रहा है.

अधिकारियों और खुफ़िया तंत्र की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि इससे पहले भी अल्फ़ा राज्य मे कई हिंसक वारदातें और हमले अंजाम देता रहा है और पिछले मामलों में भी अल्फ़ा ने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकारी थी.

ऐसे में अल्फ़ा की ओर से इन हमलों में शामिल न होने की बात के बाद भी उसे इन धमाकों से हटाकर नहीं रखा जा सकता है.

जाँच अधिकारियों का तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर धमाकों के बाद अल्फ़ा राज्य में पनपे जनाक्रोश से चिंतित और दबाव में है और इसीलिए इन हमलों से पल्ला झाड़ रहा है.

पर पुलिस की दलील से उलट अल्फ़ा की ओर से जारी एक बयान में गुरुवार को ही कह दिया गया था कि उनका इन धमाकों से कोई ताल्लुक नहीं है.

प्रधानमंत्री का दौरा

बम विस्फोटों के बाद स्थिति का जायज़ा लेने के लिए शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम पहुँच रहे हैं. मनमोहन सिंह असम से ही राज्यसभा के सदस्य हैं.

संभावना है कि उनके साथ यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी भी जाएँगीं, हालांकि इसकी अधिकृत रुप से घोषणा नहीं की गई है. केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल पहले से ही गुवाहाटी में हैं.

गृहमंत्री ने शुक्रवार को राज्य की स्थिति का आकलन करने के लिए एक बैठक भी ली है.

अधिकारियों का कहना है कि मनमोहन सिंह असम के राज्यपाल शिवचरण माथुर, मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और उनके मंत्रियों सहित राज्य के कई आला अधिकारियों से मिलेंगे.

संभव है कि प्रधानमंत्री गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज जाकर विस्फोट में घायल हुए लोगों से भी मुलाक़ात करेंगे.

इससे पहले विस्फोट की कड़ी निंदा करते हुए मनमोहन सिंह कह चुके हैं कि इन विस्फोटों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए हर संभव क़दम उठाए जाएंगे.