महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे एक बार फिर उत्तर भारतीयों के मुद्दे पर गरमागरम बयान देते नज़र आए.
हालांकि न्यायालय के पिछले दिनों मिले निर्देश के मद्देनज़र उन्होंने उत्तर भारतीयों के बारे में सीधे तौर पर कोई विवादित या तीखी टिप्पणी नहीं की पर उनका विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों को आड़े हाथों लेने में राज पीछे नहीं रहे.
राज ठाकरे ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जब उत्तर भारतीयों के समर्थन में बिहार के सारे नेता एक साथ लामबंद हो सकते हैं तो मराठा नेतृत्व क्यों बिखरा हुआ है.
पिछले दिनों उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ भड़काऊ बयानबाज़ी के मामले में राज ठाकरे को अदालत में पेश होना पड़ा था. गिरफ़्तारी और अदालत से निर्देशों के बाद राज की यह पहली प्रेस वार्ता थी.
शुक्रवार को राज ठाकरे ने प्रेस वार्ता में कहा कि वो छठ जैसी किसी भी पूजा या पर्व के ख़िलाफ़ नहीं हैं और चाहते हैं कि छठ जैसे पर्वों का राजनीतिक इस्तेमाल न हो.
माना जा रहा है कि इस बयान से राज ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को यह संकेत देना चाह रहे थे कि छठ के दौरान पार्टी के कार्यकर्ता किसी भी उत्तर भारतीय विरोधी गतिविधि से बचें.
राजनीतिकरण की राजनीति
पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के ‘मराठा-हित’ के विचार को किस तरह से देखा जा रहा है और किस तरह उन्हें घेरने की कोशिश हो रही है, वो यह समझाने से भी नहीं चूके.
राज ठाकरे ने कहा, “जब किसी और राज्य (असम) में बिहारियों पर हिंसक हमले होते हैं तब राष्ट्रपति शासन या जाँच की माँग क्यों नहीं उठती है. जब किसी मराठा युवा को परेशान किया जाता है तो उसकी जाँच क्यों नहीं बैठा दी जाती है.”
माना जा रहा है कि इस तरह जहाँ एक ओर राज ठाकरे उत्तर भारतीयों पर सीधा हमला करने से बचते रहे वहीं उन्होंने इस मुद्दे पर अपने तेवर को भी बरक़रार रखा.
इसके अलावा विश्लेषक मानते हैं कि राज शुक्रवार की प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए शिवसेना और अन्य राजनीतिक दलों की तुलना में खुद को मुंबई और महाराष्ट्र के लोगों का ज़्यादा बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिश से भी नहीं चूके.
पिछले दिनों मुंबई में कई ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं जिनमें उत्तर भारतीयों को निशाना बनाकर हमले किए गए हैं. इन हमलों के पीछे कथित रूप से राज ठाकरे के नेतृत्ववाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का हाथ बताया जाता है.
राज ठाकरे ख़ुद भी इस बारे में तीखी और विवादित होती रही टिप्पणियाँ देते रहे हैं. इसका नतीजा यह रहा है कि राज ठाकरे के खिलाफ़ कई जगहों पर जनभावनाओं को आहत करने का आरोप लगा और मामले दर्ज कराए गए है.