शुक्रवार, 31 अक्तूबर, 2008 को 18:22 GMT तक के समाचार
उड़ीसा में ईसाइयों पर हो रहे हमलों के दौरान एक नन के साथ हुए कथित बलात्कार के मामले में उड़ीसा सरकार ने शुक्रवार को पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है.
इन पर कर्तव्यपालन में लापरवाही बरतने का आरोप है.
इसके अलावा सरकार ने फ़ादर बर्नड दिगल की मौत की जाँच राज्य की अपराध शाखा से करवाने की घोषणा की है.
उल्लेखनीय है कि पिछले हफ़्ते ही बलात्कार की शिकार नन ने दिल्ली में मीडिया के सामने उपस्थित होकर आरोप लगाए थे कि पुलिस का रवैया हमलावरों के प्रति 'दोस्ताना' था और उन्होंने घटना के समय उनकी सहायता नहीं की.
नन ने 25 अगस्त की इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग की थी.
हालांकि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सीबीआई जाँच की मांग पहले ही ख़ारिज कर चुका है.
निलंबित
उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शुक्रवार को ज़िला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर पाँच पुलिस कर्मियों को निलंबित करने की घोषणा की.
इसमें उड़ीसा राज्य सशस्त्र पुलिस के एक अतिरिक्त पुलिस निरीक्षक (एएसआई) और चार हवलदार शामिल हैं.
पिछले बुधवार को ही कंधमाल के ज़िलाधीश कृष्णकुमार और पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार से नन बलात्कार मामले की रिपोर्ट देने को कहा था.
इस मामले में बालीगुड़ा थाना प्रभारी केएनराव को पहले ही निलंबित कर चुकी है. उन पर आरोप है कि 25 अगस्त की इस घटना की रिपोर्ट अगले ही दिन दर्ज हो जाने के बाद भी उन्होंने महीने भर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.
उल्लेखनीय है कि पुलिस घटना के 38 दिन बाद मीडिया में इस बारे में रिपोर्टें छपने के बाद हरकत में आई.
बालिगुडा पुलिस थाने के अधिकारी के नारायण राव ने इस देरी को यह कहते हुए टाल दिया था कि क़ानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने और कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसा हुआ.
इसके अलावा राज्य सरकार ने फ़ादर बर्नड दिगल की मौत की जाँच अपराध शाखा से करवाने की घोषणा की है.
स्थानीय पत्रकार संदीप साहू के अनुसार ईसाई नेताओं का कहना है कि उनकी मौत अगस्त में हुए हमले के कारण हुई है लेकिन चेन्नई में जिस अस्पताल में उनकी मौत हुई वहाँ के चिकित्सकों का कहना है कि उनकी मौत डेंगू के कारण हुई है.
शुक्रवार को फ़ादर दिगल का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.