मंगलवार, 28 अक्तूबर, 2008 को 15:20 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के राजनेताओं और क़बायली सरदारों ने कहा है कि सीमाओं पर जारी अशांति को दूर करने के लिए वे अब तालेबान विद्रोहियों के साथ बातचीत करना चाहते हैं.
दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ये सहमति पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई दो दिनों की बातचीत में हो सकी.
इस साझा बैठक को छोटा-जिरगा कहा जा रहा था जिसमें सीमावर्ती इलाक़ों की समस्याओं के बारे में चर्चा की गई.
इसी तरह की एक बड़ी बैठक या लोया जिरगा पिछले साल काबुल में हुआ था.
संपर्क की कोशिश
बैठक के बाद अफ़ग़ान दल के नेता अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारियों ने तय किया है कि अब कई विद्रोही गुटों के साथ संपर्क साधने की कोशिशें की जाएँगी.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी विरोधी पक्षों के लिए अब बातचीत के द्रार खुले हुए हैं.
पाकिस्तानी पक्ष के नेता ओवैस ग़नी ने कहा कि ये पेशकश संघर्ष में लिप्त सभी पक्षों के लिए है और दोनों देशों के प्रभावशाली लोग अब विरोधी शक्तियों से संपर्क करने की कोशिश करेंगे.
कई प्रेक्षकों की राय है कि तालेबान के चरमपंथी आंदोलन को सैनिक तरीक़े से नहीं हराया जा सकता और इसका कोई राजनीतिक समाधान तलाश किया जाना चाहिए.
मगर पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिमी देशों के बीच इस मामले पर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस प्रश्न पर गहरे मतभेद रहे हैं.