रविवार, 26 अक्तूबर, 2008 को 06:57 GMT तक के समाचार
श्रीलंका के स्थानीय तमिल लोगों की स्थिति पर आज भारत और श्रीलंका के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय विचार विमर्श हो रहा है.
श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई ( लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) के ख़िलाफ सेना ने बड़ा अभियान छेड़ रखा है और भारत में तमिलनाडु के राजनीतिक दलों का कहना है कि इसमें बेकसूर तमिल लोग भी फंसे हुए हैं.
दोनों पक्षों के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में बैठक चल रही है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति के विशेष सलाहकार बसिल राजपक्षा इस संबंध में विदेश मंत्रि प्रणव मुखर्जी के साथ विचार विमर्श के लिए भारत आए हुए हैं.
अपनी बातचीत में राजपक्षा भारत सरकार को तमिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे उपायों की जानकारी देंगे.
अपनी यात्रा के दौरान बसिल राजपक्षा की मुलाक़ात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से भी होनी है. बसिल श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षा का विशेष संदेश लेकर आए हैं.
इससे पहले राष्ट्रपति राजपक्षा ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ शनिवार को टेलीफ़ोन पर बातचीत की थी और आश्वासन दिया था कि श्रीलंका में तमिल समुदाय की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं.
भारत ने यह आशंका जताते हुए कि लिट्टे और सरकारी सेना की लड़ाई में आम तमिल लोगों को नुकसान हो सकता है, श्रीलंका सरकार से जानना चाहा था कि तमिल समुदाय की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह श्रीलंका के राष्ट्रपति से पहले ही कह चुके हैं कि श्रीलंका में चल रहे संघर्ष में आम तमिलों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.
ऐसा माना जा रहा है कि भारत के इस रुख को देखते हुए ही श्रीलंका ने अपने एक उच्च स्तरीय अधिकारी को बातचीत के लिए भारत भेजा है.
भारत सरकार पर पहले से ही द्रविड़ मुनेत्र कषगम और कुछ अन्य क्षेत्रीय दल श्रीलंका में संघर्ष समाप्त करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं.