रविवार, 26 अक्तूबर, 2008 को 12:11 GMT तक के समाचार
रेहाना बस्तीवाला
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
महाराष्ट्र पुलिस का आतंकवाद निरोधक दल (एटीएस) मालेगाँव और सूरत में हुए धमाकों के सिलसिले में दो पूर्व सैनिक अधिकारियों से पूछताछ कर रहा है.
इनमें से एक मेजर जनरल और दूसरा सेना का जवान हैं. दोनो ही पुणे के रहने वाले हैं.
हालाँकि एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे ने इसकी पुष्टि करने से इनकार कर दिया और कहा है कि इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.
लेकिन पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है और ये भी कहा है कि इन्हें नासिक के कोर्ट में पेश किया जाएगा.
मालेगाँव और सूरत के शहर मोडासा में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था इसलिए एटीएस शुरू से इस बात की छानबीन कर रहा था कि हिंदूवादी संगठन हिंदू जागरण मंच को बम बनाने के लिए किसने आरडीएक्स उपलब्ध कराया और बम बनाने की ट्रेनिंग किसने दी.
सूत्रों का कहना है कि सेना कि इन दो पूर्व अधिकारियों को एटीएस ने पुणे से हिरासत में लिया था और इनसे कई दिनों से पूछताछ की जा रही थी.
भाषण
सूत्रों का कहना है कि पूर्व जनरल गिरफ़्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह के भाषण से बहुत प्रभावित हुए थे. एटीएस ने साध्वी के भाषणों की कई कैसेट्स जमा की है.
एटीएस ने 24 अक्तूबर को हिंदू जागरण मंच के तीन कार्यकर्ताओं को धमाकों के सिलसिले में गिरफ़तार किया था. साध्वी विश्व हिंदू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी की सदस्य हैं.
पुलिस ने साध्वी प्रज्ञा के मोबाइल पर कड़ी नज़र रखी हुई थी. एटीएस का कहना है के साध्वी ने अपने साथ गिरफ़्तार हुए व्यक्ति के साथ 400 मिनट तक मोबाइल पर बातचीच की थी और पुलिस ने इस बातचीत से बहुत से सबूत इकट्ठा किए.
इन्हें इससे बम धमाके की कथित साज़िश का भी पता चला है. एटीएस के मुताबिक़ गिरफ़्तार अभियुक्तों में से श्यामलाल साहू कॉमर्स ग्रेजुएट हैं जिनकी अपनी मोबाइल की दूकान है जबकि दूसरे अभियुक्त शिवनारायण सिंह बीएससी ग्रेजुएट हैं.
एटीएस को शक है के इन दोनो ने बम बनाए होंगे. एटीएस के मुताबिक़ मालेगाँव में बम बनाने से पहले अभियुक्तों ने मालेगाँव का कई बार दौरा भी किया था.
एटीएस के सूत्रों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में और गिरफ़्तारियाँ हो सकती हैं. एटीएस की टीम मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में मौजूद है.
अब तक जितनी गिरफ़्तारियाँ हुई हैं वो सब इंदौर के रहने वाले हैं. इस बीच साध्वी की गिरफ़्तारी के बाद से देशभर के कट्टरपंथी हिंदूवादी संगठनों ने ऐतराज़ करना शुरू कर दिया है. वो इसे राजनीतिक फ़ायदे से जोड़कर देख रहे हैं.
महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन गडकरी का कहना है कि कोई भी हिंदू संगठन किसी भी तरह के बम धमाकों में शामिल नहीं है. जबकि ऐसी सैंकड़ो घटनाएँ हैं जिनमें मुस्लिम चरमपंथी शामिल हैं.
दूसरी तरफ़ उमा भारती ने भी साध्वी की गिरफ़्तारी का विरोध किया. उनका कहना था कि प्रज्ञा सिर्फ़ एक साध्वी हैं इनका किसी भी आतंकवादी घटना से कोई लेना-देना नहीं है.