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शनिवार, 25 अक्तूबर, 2008 को 07:23 GMT तक के समाचार

अफ़ीम की पैदावार में कमी का अनुमान

अमरीकी सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम उत्पादन में इस वर्ष कम से कम एक तिहाई की गिरावट आएगी.

व्हाइट हाउस की 'नेशनल ड्रग कंट्रोल पॉलिसी' की रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान में बीते साल 8000 टन अफ़ीम उत्पादन के मुक़ाबले इस वर्ष 31 फ़ीसदी कमीं के साथ 5,500 टन अफ़ीम उत्पादन का अनुमान ज़ाहिर किया गया है.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम उत्पादन में इस वर्ष केवल छह फ़ीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है.

संयुक्त राष्ट्र के अलग आंकड़े

दुनिया भर में हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाली अफ़ीम का 90 फ़ीसदी उत्पादन अफ़ग़ानिस्तान में होता है.

व्हाईट हाउस के नेशनल ड्रग कंट्रोल पॉलिसी कार्यालय के निदेशक जॉन वॉल्टर का कहना है, ''हमें आज यह घोषणा करते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है कि अमरीकी सरकार के अनुमान के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती और अफ़ीम उत्पादन में उल्लेखनीय कमी देखी गई है.''

वॉल्टर का कहना है कि अफ़ीम उत्पादन में 22 फ़ीसदी की गिरावट होगी जो संयुक्त राष्ट्र के ड्रग एंड क्राइम ऑफ़िस के अगस्त में प्रकाशित अनुमान से मेल खाता है.

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती का रक़बा बढ़ा है. लेकिन इसके विपरीत अमरीका का कहना है कि अफ़ीम की खेती का रक़बा घटा है.

वॉल्टर का कहना अमरीका और संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों में फ़र्क इसलिए है क्योंकि दोनों के आँकड़े जुटाने के तरीक़े अलग-अलग हैं.

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के 34 में से 18 प्रांतों में अब अफ़ीम की खेती नहीं की जा रही है. पहले ऐसे राज्य की संख्या 15 थी जहाँ खेती नहीं की जाती.

अधिकारियों का कहना है कि सूखा पड़ना और मादक पदार्थ विरोधी अभियान अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम उत्पादन में कमी के प्रमुख कारण हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी और पूर्वी इलाक़ों में मादक पदार्थ विरोधी मुहिम की सफलता का उल्लेख करते हुए वॉल्टर कहते हैं, ''इससे हमें साफ़ संकेत मिलता है हम ऐसा कर सकते हैं. हमें इसे बरक़रार रखने भर की ज़रूरत है.''

दक्षिणी हेलमंद प्रांत में देश में कुल अफ़ीम उत्पादन का क़रीब 66 फ़ीसदी उत्पादन होता है. दक्षिणी हेलमंद प्रांत में तालिबान विद्रोही सक्रिय हैं.

मादक पदार्थों के व्यापार से चरमपंथियों को धन मिलता है.

वॉल्टर का कहना है कि चरमपंथ, अफ़ीम की खेती और भ्रष्टाचार से एक साथ निपटने की ज़रूरत है.