शुक्रवार, 24 अक्तूबर, 2008 को 14:04 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद प्रभुनाथ सिंह और छह अन्य लोगों को 13 साल पहले हुई दो हत्याओं के मामले में बरी कर दिया गया है.
पटना के एक त्वरित न्यायालय ने यह फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि इन हत्याओं के मामले में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका इसलिए अभियुक्तों को संदेह लाभ दिया जा रहा है.
बाहुबली छवि के प्रभुनाथ सिंह पर पीड़ित पक्ष के लोग आरोप लगाते रहे हैं कि वे साक्ष्य मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और गवाहों को धमका रहे हैं.
फ़ैसले के बाद सरकारी वकील ने कहा है कि वे फ़ैसले के बिंदुओं पर विचार करने के बाद तय करेंगे कि इसे उच्च अदालत में चुनौती दिया जाए या नहीं.
मामला
वर्ष 1995 में विधानसभा चुनाव के दौरान छपरा ज़िले के मशरख में दो व्यक्तियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
जेडीयू सांसद प्रभुनाथ सिंह और उनके छह समर्थकों पर इस हत्या का आरोप लगाया गया था.
यह मामला पहले छपरा की अदालत में चला फिर पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से इसे भागलपुर स्थानांतरित किया गया और फिर आख़िर में पटना स्थानांतरित कर दिया गया.
13 साल चले इस मुक़दमे के अधिकांश गवाह एक-एक करके मुकर गए.
इस मुक़दमें के अंतिम दौर में तो पीड़ित पक्ष ने ये आरोप भी लगाए थे कि सरकारी वकील ख़ुद ही साक्ष्यों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं.
बिहार में पहली बार त्वरित न्यायालय से पहली बार किसी राजनीतिज्ञ को इतनी बड़ी राहत मिल रही है.
इससे पहले सांसद शाहबुद्दीन, राजेश रंजन ऊर्फ़ पप्पू, सूरजभान और पूर्व सांसद आनंद मोहन को ऐसी राहत नहीं मिल सकी थी.