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शुक्रवार, 24 अक्तूबर, 2008 को 13:11 GMT तक के समाचार

नन ने की सीबीआई जाँच की माँग

उड़ीसा में ईसाइयों पर हो रहे हमलों के बीच कथित रुप से बलात्कार की शिकार हुई नन ने पहली बार सार्वजनिक रुप से सामने आकर सीबीआई जाँच की माँग की है.

दिल्ली में एक मीडिया के सामने नन ने आरोप लगाया कि पुलिस का रवैया हमलावरों के प्रति 'दोस्ताना' था.

नन ऐसे समय में सार्वजनिक रुप से उपस्थित होकर सीबीआई जाँच की माँग कर रही हैं जब दो दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त की इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग को ख़ारिज किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने नन को मामले की जाँच में सहयोग करने के निर्देश भी दिए हैं.

अपने चेहरे को ढँके हुए नन मीडिया के सामने आईं और उन्होंने लिखा हुआ अपना बयान पढ़ा.

नन ने आरोप लगाया है कि उड़ीसा पुलिस ने उनका बयान नहीं लिया और उल्टे उन पर एफ़आईआर न करवाने के लिए दबाव डाला.

कंघमाल ज़िले में हुई इस घटना के बाद ग़ायब हो गईं नन ने कहा कि वे मामले की सीबीआई जाँच चाहती हैं.

अपने बयान में उन्होंने घटना का विस्तृत विवरण दिया है.

इसमें बताया गया है कि किस तरह उड़ीसा पुलिस ने एफ़आईआर लिखने में आनाकानी की और एफ़आईआर दर्ज करवाने के नतीजे भुगतने की धमकी भी दी.

उनका कहना था कि उड़ीसा पुलिस निष्पक्ष नहीं है और उसका रवैया हमलावरों के प्रति बहुत 'दोस्ताना' था.

उन्होंने कहा कि लगभग 50 लोगों के एक समूह ने उनके कपड़े फाड़ डाले और पुलिस तमाशा देखती रही.

उन्होंने कहा, "मेरा ब्लाउज़ और अंतरवस्त्र फाड़ दिए गए. वह लगातार मेरे गालों पर थप्पड़ मार रहे थे और मेरी पीठ पर लाठियाँ बरसा रहे थे. दो आदमियों ने मेरे हाथ पकड़े और तीसरे ने मेरा बलात्कार किया".

देर से आई रिपोर्ट

कंधमाल ज़िले के पेस्टोरल सेंटर में काम करने वाली 29 वर्षीय नन के साथ 25 अगस्त को हुए कथित बलात्कार का मामला दो अक्तूबर महीने के शुरु में सार्वजनिक हो सका था.

स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज होने और उनका मेडिकल टेस्ट होने के बावजूद पुलिस ने ये रिपोर्ट ही चिकित्सकों से नहीं ली.

पुलिस थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक कंधमाल में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़कने के बाद इस नन और 55-वर्षीय फ़ादर थॉमस ने एक स्थानीय हिंदू के घर में शरण ले रखी थी.

रिपोर्ट के अनुसार लेकिन उस दिन इन दोनों को उस हिंदू के घर से घसीट कर बाहर निकाला गया और एक घर में उनसे कथित बलात्कार हुआ, जिसके बाद उन्हें सड़क पर अर्धनग्न अवस्था में चलने पर मजबूर किया गया.

पीड़ित महिला का मेडिकल टेस्ट करने वाली डॉक्टर संगीता मिश्र ने इस बाद की पुष्टि की कि नन का बलात्कार हुआ. उनका कहना था, "हमने मेडिकल टेस्ट के तत्काल बाद पुलिस को सूचना दी थी लेकिन वे मेडिकल रिपोर्ट लेने ही नहीं पहुँचे."

पुलिस मीडिया में इस बारे में रिपोर्टें छपने और घटना के 38 दिन बाद हरकत में आई.

बालिगुडा पुलिस थाने के अधिकारी के नारायण राव ने इस देरी को यह कहते हुए टाल दिया था कि क़ानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने और कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसा हुआ.