शुक्रवार, 24 अक्तूबर, 2008 को 11:41 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर के अधिकतर भागों में संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर अलगाववादी नेताओं की हड़ताल से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है.
घाटी में ज़्यादातर दुकानें, दफ़्तर, बैंक, स्कूल- कॉलेज और बाज़ार बंद हैं और बहुत कम संख्या में सरकारी कर्मचारी काम पर आ पाए हैं.
छोटी गाड़ियों को छोड़ यातायात भी पूरी तरह से बंद है. श्रीनगर के कुछ हिस्सों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और पुलिस ने प्रदर्नकारियों को तितर बितर करके लिए आँसू गैस के गोले छोड़े हैं.
हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के अनुसार शुक्रवार का प्रदर्शन, 'संयुक्त राष्ट्र को ये याद दिलाना है कि छह दशक बाद भी कश्मीर समस्या का समाधान नहीं निकल सका है.'
कश्मीर पर दावा
ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर पर अपना-अपना दावा पेश करते हैं और इसके लिए दोनों देशों के बीच दो युद्ध भी हो चुके हैं.
अलगाववादी धड़ों की माँग है कि 'संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव को लागू किया जाए जिसके अंतर्गत कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का प्रावधान है.'
वैकल्पिक तौर पर अलगाववादी धड़े यह भी कहते हैं कि कश्मीर समस्या का हल त्रिपक्षीय बातचीत से किया जाना चाहिए जिसमें भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी जनता शामिल हों.
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और यासिन मलिक ने कश्मीरी जनता से अपील की है कि वे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को पत्र तथा ईमेल भेजें ताकि उनका ध्यान कश्मीर समस्या पर दिलाया जा सके.
मीरवायज़ नज़रबंद
शुक्रवार को हुर्रियत के उदार धड़े के नेता मौलवी मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ को उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया है. वो श्रीनगर की जामा मस्जिद में जुमा की नमाज़ पढ़ने नहीं जा सके जहाँ वो हर हफ़्ते तक़रीर करते हैं.
इस बीच अलगाववादी नेताओं ने राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की है. राज्य में सात चरणों में होने वाले मतदान की शुरुआत 17 नवंबर को हो रही है.
दुसरी तरफ़ सरकार ने चुनाव से पहले अलगाववादी नेताओं की धरपकड़ शुरु कर दी है और इस बीच पिछले दो दिनों में ऐसे कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
पिछले दिनों अलगाववादियों के आह्वान पर कश्मीर में भारत के ख़िलाफ़ होने वाला प्रदर्शन 1990 के बाद अलगाववादी नेताओं के आह्वान पर होने वाला सबसे बड़ा प्रदर्शन था.