रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने क़ानून और जनमत के दबाव के कारण रायबरेली में रेल कोच फ़ैक्ट्री लगाने के लिए ज़मीन तो वापस कर दी लेकिन एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बलविंदर कुमार को निलंबित कर दिया.
उन पर मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बिना रेल विभाग को ज़मीन आबंटन का आरोप है.
इससे पहले सरकार ने उन्हें प्रमुख सचिव राजस्व के पद से हटाकर न्यायिक सदस्य राजस्व परिषद के महत्वहीन पद पर इलाहाबाद भेज दिया था.
बलविंदर कुमार राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव थे और उन्होंने रेल कोच फ़ैक्ट्री को ज़मीन देने की स्वीकृति दी थी.
रायबरेली के लालगंज में लगभग पाँच सौ एकड़ यह जमीन 30 वर्षों से केन्द्र सरकार के कृषि विभाग के पास थी.
रेल विभाग ने अगल बगल की लगभग 900 एकड़ जमीन अधिगृहीत करने के अलावा केंद्रीय कृषि फार्म की जमीन भी मांगी थी.
क़ानूनन ज़मीन का बंदोबस्त ग्राम समाज और राज्य का राजस्व विभाग करता है इसलिए कार्रवाई जिला कलेक्टर और कमिश्नर के माध्यम से हो रही थी.
जानकार लोगों के अनुसार राजस्व विभाग ने मई महीने में इसकी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी थी और मुख्यमंत्री कार्यालय ने उस पर सैद्धांतिक सहमति दे दी थी.
इसके बाद मामला मंत्रिमडल के सामने जाना था.
लेकिन बाद में राजस्व विभाग ने राय दी कि नियमानुसार इसका निर्णय कमिश्नर स्तर से ही होना चाहिए इसलिए मामला मंत्रिमंडल को नहीं भेजा गया.
ज़मीन का विवाद
जानकार सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के संबंधित अधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताए बिना उनका सैद्धांतिक अनुमोदन भेज दिया था.
मुख्यमंत्री को पूरे मामले का पता तब चला जब पिछले दिनों सोनिया गांधी ने कोच फ़ैक्ट्री के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम भेजा.
नाराज़ मुख्यमंत्री मायवती ने न केवल ज़मीन का आबंटन रद्द कर दिया बल्कि सोनिया गांधी की रैली की अनुमति भी नामंजूर कर दी गई.
प्रमुख सचिव राजस्व बलविंदर कुमार को एक जूनियर पद न्यायिक सदस्य राजस्व परिषद के पद पर इलाहाबाद भेज दिया गया.
विजय शंकर पाण्डेय को कमिश्नर पद से हटाकर अतिरिक्त कैबिनेट सचिव बना दिया गया ताकि वो मुख्यमंत्री कार्यालय में फाइलें ठीक से देख सकें.
कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह आईएएस अफ़सर नहीं बल्कि मूलत: एक पायलट हैं.
मगर हाईकोर्ट ने मायावती के फैसले पर रोक लगा दी और जनमत भी ख़िलाफ़ दिखा. सोनिया गांधी ने विरोध में जेल जाने तक की बात कह दी.
मामला सुलझाने के लिए मायावती ने अपने विश्वासपात्र प्रमुख सचिव नेत राम को लगाया.
नेत राम की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने ज़मीन तो वापस कर दी लेकिन उनका गुस्सा तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व बलविंदर कुमार पर गिरा.
बलविंदर कुमार की गिनती अच्छे अफसरों में होती है. मुख्यमंत्री भी उन्हें मानती थीं.
प्रेक्षकों का कहना है कि बलविंदर कुमार मुख्यमंत्री कार्यालय में चल रहे सत्ता संघर्ष का शिकार हुए.