गुरुवार, 23 अक्तूबर, 2008 को 13:18 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने विधानसभा चुनावों से पहले अलगाववादी नेताओं की धरपकड़ शुरु कर दी है.
इस सिलसिले में गुरूवार को पुलिस ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक सहित कई स्थानीय अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार किया है.
ग़ौरतलब है कि राज्य में सात चरणों में होने वाले मतदान की शुरुआत 17 नवंबर को हो रही है जबकि अलगाववादी नेताओं ने चुनाव बहिष्कार करने की घोषणा की है.
अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि कहीं अलगाववादी नेताओं के चुनाव बहिष्कार को जनता की बड़ी हिमायत न मिल जाए. क्योंकि ये चुनाव घाटी में पिछले दिनों भारत के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों के तुरंत बाद हो रहे हैं.
पिछले महीनों घाटी में अलगाववादी नेताओं के आह्वान पर भारत के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों में हज़ारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया था.
जानकारों की राय में पिछले दिनों भारत के ख़िलाफ़ होने वाला प्रदर्शन 1990 के बाद अलगाववादी नेताओं के आह्वान पर होने वाला सबसे बड़ा प्रदर्शन था.
यासीन मलिक गिरफ़्तार
पुलिस ने बुधवार की रात जेकेएलएफ़ के अध्यक्ष यासीन मलिक को उनके घर से गिरफ़्तार किया है. पुलिस का कहना है कि उन्हें ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
यासीन मलिक ने बुधावार को उत्तरी ज़िला बांदीपोरा के हजिन में एक चुनाव विरोधी रैली को संबोधित किया था और लोगों से चुनाव में हिस्सा न लेने की अपील की थी
दूसरी तरफ़ पुलिस ने धार्मिक संगठन जामाअत-ए-अहले हदीस के प्रमुख मौलाना शौक़त को भी बुधवार की रात गिरफ़्तार किया है.
पुलिस ने गुरूवार को राजबाग स्थित हुरियत कॉन्फ़्रेंस (गिलानी गुट) के दफ़्तर पर छापा मार कर कार्यकारी अध्यक्ष ग़ुलाम नबी सुमझी को भी गिरफ़्तार कर लिया है.
अधिकारियों ने मौलाना शौक़त और ग़ुलाम नबी सुमझी की गिरफ़्तारियों के बारे में कुछ भी बताने से इनकार किया है.
ग़ौरतलब है कि अलगाववादी नेताओं की माँग है कि राज्य में विधानसभा के चुनाव करवाने की जगह आज़ादी की माँग पर जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए.