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बुधवार, 22 अक्तूबर, 2008 को 10:42 GMT तक के समाचार

राज ठाकरे को अंतरिम ज़मानत मिली

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे को कल्याण की एक अदालत ने दो दिन की अंतरिम ज़मानत दे दी है. लेकिन 24 अक्तूबर को उन्हें फिर अदालत में पेश होने होगा और सामान्य ज़मानत का फ़ैसला होगा.

बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार हाल में उनके समर्थकों की हिंसक गतिविधियों के बाद राज ठाकरे के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र में अनेक न्यायिक मामले चल रहे हैं और आने वाले दिनों में उन्हें कई अदालतों में पेश होना पड़ सकता है.

उधर मुंबई के कुछ हिस्सों और थाणे में राज ठाकरे के समर्थकों ने हिंसा की है. मुंबई से 60 किलोमीटर दूर मानपाड़ा में जब राज ठाकरे की पत्नी शर्मीला जब पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैंठ गईं तो इलाक़े में तनाव फैल गया और स्थानीय प्रशासन ने उन इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया.

राज ठाकरे की गिरफ़्तारी के बाद महाराष्ट्र के थाणे में दो गुटों के बीच हुए टकराव में तीन लोगों की मौत हो गई और पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 179 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

बढ़ती हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने कल्याण अदालत और मानपाड़ा पुलिस थाने के आसपास कर्फ़्यू लगा दिया है.

थाणे के पुलिस आयुक्त अनिल धेरे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कल्याण इलाक़े के पिसोली गांव में मंगलवार रात दो गुटों के बीच हिंसा भड़क गई.

हिंसा के बाद गिरफ़्तारियाँ

उन्होंने बताया कि मंगलवार रात से अब तक हिंसा फैलाने के आरोप में पुलिस ने 179 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

मारे गए लोगों की पहचान ओमप्रकाश दुबे, मयूर दुबे और गुरुनाथ बोहिर के रूप में हुई है. बोहिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक स्थानीय नेता के भाई हैं.

पुलिस आयुक्त ने कहा कि वे अभी यह पता लगा रहे हैं कि यह घटना पुरानी दुश्मनी का नतीजा है या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उत्तर भारतीय लोगों के बीच हुई झड़पों का.

हिंसा की घटनाओं के बाद इलाक़े की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है लेकिन अभी तक कर्फ़्यू नहीं लगाया गया है.

इस इलाके में पहले भी उत्तर भारतीयों और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें होती रही हैं.

राज ठाकरे की मंगलवार सुबह गिरफ़्तारी के बाद कल्याण और आसपास के इलाक़े में हिंसा भड़की थी. राज को मंगलवार रात मानपाड़ा पुलिस थाने में रखा गया था.

बुधवार सुबह राज ठाकरे की पत्नी शर्मिला उनसे मिलने थाने में पहुँची. पुलिस ने उन्हें तो राज से मिलने दिया लेकिन उनके साथ गए कार्यकर्ताओं को अंदर जाने से रोक दिया.

इससे नाराज़ शर्मिला ने थाने के बाहर धरने पर बैठ गईं. उनका कहना था कि जबतक राज बाहर नहीं आ जाते वह धरने पर बैठी रहेंगी.