मंगलवार, 21 अक्तूबर, 2008 को 10:05 GMT तक के समाचार
भारत की राज्यसभा में महाराष्ट्र में रेल परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों और रेल स्टेशनों पर हुई हिंसा का मामला छाया रहा है. विभिन्न दलों ने जहाँ हिंसा की निंदा की है, वहीं कंद्रीय गृह मंत्री और रेल मंत्री ने शंकाओं के जवाब देने के प्रयास किए हैं.
गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है राज्य सरकार को न केवल इस मुद्दे पर तीन बार नोटिस दिया गया है बल्कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री के हिंसा के दौरान ही बातचीत की थी.
गृह मंत्री शिवराज पाटिल का कहना था, "महाराष्ट्र में रेल स्टेशनों और परीक्षा केंद्रो पर जो हिंसा हुई है उसकी निंदा करनी ही होगी.
शिवराज पाटिल का कहना था, "इस तरह हिंसा भड़काने के मामलों में राज्य सरकार ने 336 मामले दर्ज किए हैं, 1800 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं और हिंसा के ख़तरे को देखते हुए एहतियात के तौर पर 3800 लोगों को हिरासत में लिया गया है."
पाटिल ने ज़ोर देकर कहा कि भारत में किसी को भी कहीं भी जाकर काम करने का अधिकार संविधान देता है.
उनका कहना था कि जो लोग इसमें अड़चन पैदा करते हैं या फिर अन्य लोगों को भड़काते हैं, उन्हें किसी भी तरह की रियायत नहीं दिखाई जाएगी और अनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
'लोगों को गुस्सा आएगी ही'
शिवराज पाटिल का कहना था कि रेल मंत्री लालू यादव ने उन्हें बताया है कि दो लाख 29 हज़ार छात्रों को नोटिस देकर महाराष्ट्र में 307 जगह पर परीक्षा देने के लिए बुलाया गया था और सभी जगह पर परीक्षा हुई है.
इससे पहले शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने रेलवे की नौकरियों में महाराष्ट्र निवासियों के साथ भेदभाव के आरोप लगाए.
उनका कहना था, "लालू यादव को इस ओर ध्यान देना होगा कि यदि बीमा और बैंकिंग क्षेत्र में महाराष्ट्र के अनेक लोगों को नौकरियाँ मिलती हैं तो रेलवे में महाराष्ट्र वाले केवल दस प्रतिशत क्यों हैं? बाहर से लोग महाराष्ट्र में आएँ, नौकरियाँ पाएँ और चले जाएँ, ऐसा नहीं होना चाहिए...लोगों को गुस्सा तो आएगा ही."
'रेल परीक्षा पारदर्शी'
उधर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने राज्यसभा को बताया, "जो छात्र रेलवे की परीक्षा नहीं दे पाए हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौक़ा दिया जाएगा. रेल परीक्षाओं के मामले में ज़ोर देकर कहा कि रेल परीक्षाएँ पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो रही हैं."
उनका कहना था, "पेपर कंप्यूटरों के ज़रिए बनता है और ऐसे ही चेकिंग होती हैं और यदि किसी को शक़ हो तो वो आकर देख सकता है."
उधर समता पार्टी नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि रेलवे की परीक्षा में धाँधली हो ही नहीं सकती क्योंकि कि प्रक्रिया इस तरह की है कि ये संभव नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री मूक दर्शक बने बैठे रहे हैं जबकि उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए थी.