http://www.bbcchindi.com

रविवार, 19 अक्तूबर, 2008 को 06:35 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

मिज़ोरम चुनावों में त्रिकोणीय मुक़ाबला

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिज़ोरम में 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए 29 नवंबर को होने वाले मतदान में सत्तारूढ मिज़ो नेशनल फ़्रंट (एमएनएफ़), मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक एलायंस (यूडीए) के बीच त्रिकोणीय मुक़ाबला होने की संभावना है.

नवगठित यूडीए में ज़ोराम नेशनलिस्ट पार्टी और मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस शामिल हैं और इसे किसानों के संगठन ज़ोरम कुथनथव्कतू पाल (जेडकेपी) का भी समर्थन प्राप्त है.

जोरमथंगा की अगुवाई वाला एमएनएफ़ सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहा है.

इन पार्टियों के अलावा भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार भी विधानसभा चुनावों में अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं.

वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों में एमएनएफ़ ने 21, कांग्रेस ने 12 और विभिन्न छोटे दलों ने सात सीटों पर सफलता हासिल की थी.

अहमियत

रणनीतिक दृष्टि से मिज़ोरम भारत के लिए बहुत अहम है. इसके पूर्व में बर्मा स्थित है तो पश्चिम में बांग्लादेश है.

मिज़ोरम की 40 सदस्यीय विधानसभा में से 39 सीटें जनजातियों के आरक्षित हैं जबकि एक सामान्य वर्ग के लिए सुरक्षित है.

इन विधानसभा चुनावों में 611,124 मतदाता हिस्सा लेंगे और इनमें से लगभग 90 फ़ीसदी मतदाताओं को फ़ोटो पहचान पत्र जारी कर दिए गए हैं.

मिज़ोरम में पहली बार विधानसभा चुनाव 1972 में हुआ था.

तब मिज़ोरम केंद्र शासित प्रदेश था और विधानसभा की 30 सीटें हुआ करती थीं जो अब बढ़कर 40 हो गई हैं.

पहले चुनाव में बस दो ही पार्टियाँ काँग्रेस और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी चुनाव लड़ी थीं. उनके अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे.

पहले चुनाव में काँग्रेस को छह सीटें मिलीं थीं जबकि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी.

इन चुनावों में 24 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्ज़ा कर लिया था और सी छुंगा राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे जो ख़ुद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतकर आए थे.