शनिवार, 18 अक्तूबर, 2008 को 11:50 GMT तक के समाचार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने श्रीलंका में जारी संघर्ष के बारे में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी का स्वागत किया है कि वहाँ के संकट का समाधान बातचीत से किया जाना चाहिए.
द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम पार्टी के प्रमुख करुणानिधि ने अपनी पार्टी के मुखपत्र "मुरासोली" में लिखा है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी से उन्हें ये आशा बँधी है कि केंद्र श्रीलंका में सेना के तमिल क्षेत्र पर जारी चढ़ाई को रोकने के लिए क़दम उठा सकता है.
उन्होंने लिखा है कि विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी प्रधानमंत्री की ही तरह की बातें कहीं हैं जिससे लगता है कि केंद्र पिछले 14 अक्तूबर को चेन्नई में हुई सर्वदलीय बैठक में पारित प्रस्ताव पर ध्यान दे रहा है.
श्रीलंका में सेना ने उत्तर में अलगाववादी तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़े में अभी तक का सबसे बड़ा सैनिक अभियान शुरू किया है जिसके बाद हो रहे संघ्रर्ष के कारण दो लाख से अधिक तमिलों को विस्थापित होना पड़ा है.
श्रीलंका की इस स्थिति पर भारत के तमिलनाडु राज्य में राजनेताओं ने भारी रोष जताया है और उन्होंने केंद्र से हस्तक्षेप की माँग की है.
डीएमके नेता ने इस बारे में 14 अक्तूबर को चेन्नई में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें जारी प्रस्ताव में कहा गया था कि केंद्र ने यदि एक पखवाड़े के भीतर इस मामले में कुछ नहीं किया तो राज्य के सारे सांसद त्यागपत्र दे देंगे.
मनमोहन सरकार की सहयोगी डीएमके के 13 लोकसभा और चार राज्यसभा सांसदों ने पार्टी नेता करुणानिधि को आगे की तारीख़ में दिया गया अपना त्यागपत्र सौंप भी दिया है. इनमें सात सांसद केंद्र सरकार में मंत्री हैं.
लोकसभा में डीएमके के 16 सांसद हैं लेकिन निलंबित सांसद दयानिधि मारन और डीएमके के चुनाव चिन्ह पर लड़ने वाले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद खादर मोहिदीन अपना इस्तीफ़ा सौंपने के लिए पार्टी मुख्यालय पर नहीं आए.
तमिलनाडु के प्रमुख विपक्षी दल एआईडीएमके की नेता जे जयललिता ने डीएमके सांसदों के त्यागपत्र को दिखावे का नाम दिया है और कहा है कि यदि डीएमके तमिलों की स्थिति के बारे में इतनी ही गंभीर है तो करुणानिधि को मुख्यमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए.