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गुरुवार, 16 अक्तूबर, 2008 को 11:15 GMT तक के समाचार

मंदी के बीच मंत्री आमने-सामने

भारत के विमानन क्षेत्र में आई मंदी के बीच केंद्र सरकार के दो मंत्रियों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

नागरिक उड्डयन मंत्री जहाँ विमान कंपनी की ओर खड़े नज़र आ रहे हैं. दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्री विमानन कंपनियों की सहायता का आश्वासन तो दे रहे हैं लेकिन वे उनसे बकाया चुकाने का तकाज़ा भी कर रहे हैं.

नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने बुधवार को हैदराबाद में कहा था कि विमानन क्षेत्र की प्रक्रिया से जुड़े मंत्रालय उन्हें सहयोग नहीं कर रहे हैं.

पटेल ने कहा था कि अगर कल भारत के आकाश में कोई विमान उड़ान नहीं भरता है तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा.

उन्होंने कहा था, "कई राज्य सरकारें इन विमान कंपनियों को सहयोग नहीं कर रही हैं. इससे मैं चिंतित हूँ. वे राज्य सरकारें यह नहीं समझ रही हैं कि इससे उन्हें कितना फ़ायदा होगा."

उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा कि सरकार विमानन कंपनियों को सहायता देने के लिए प्रयास कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि इसके पहले विमान कंपनियों को अपना वादा निभाते हुए पहले तेल कंपनी इंडियन ऑयल के बकाए का भुगतान करना चाहिए.

पेट्रोलियम मंत्री ने समाचार माध्यमों से बात करते हुए कहा कि इंडियन ऑयल का जेट एयरवेज़ पर 859 करोड़ और किंगफ़िशर पर 110 करोड़ रुपये का बकाया है.

जेट एयरवेज़ से निकाले गए 1900 कर्मचारियों के सावाल पर देवड़ा ने कहा कि जब सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्री जब समस्या से उबरने का प्रयास कर रहे हैं तो ऐसे में कर्मचारियों की निकाला जाना ठीक नहीं है.

उन्होंने बताया कि 31 अक्तूबर या एक नवंबर को विमानों में प्रयोग किए जाने वाले ईंधन के मूल्य की समीक्षा की जा सकती है.

विमानन कंपनियाँ ईंधन के महँगे दाम, दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी और यात्रियों की घटती संख्या से इन दिनों घाटे में चल रही हैं.

माना जा रहा है कि इन कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए सरकार ईंधन पर लगने वाले करों में कटौती, पार्किंग या लैंडिंग के लिए लगने वाले शुल्क में कटौती कर सकती है.