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बुधवार, 15 अक्तूबर, 2008 को 11:19 GMT तक के समाचार

डीएमके और सहयोगी दलों की चेतावनी

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके और उसके कुछ सहयोगी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने श्रीलंका में युद्धविराम न करवाया तो सभी सांसद इस्तीफ़ा दे देंगे.

डीएमके की राज्यसभा सांसद और डीएमके नेता करुणानिधि की बेटी कनीमोली ने प्रतीक के तौर पर अपना इस्तीफ़ा अपने पिता को भेज भी दिया है.

इन दलो ने केंद्र की यूपीए सरकार को कार्रवाई के लिए दो हफ़्तों का समय दिया है.

डीएमके यूपीए की सहयोगी पार्टी है.

डीएमके और सहयोगी दलों का कहना है कि श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाई से वहाँ के तमिलों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

श्रीलंका में सेना तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के ख़िलाफ़ पिछले कुछ महीनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में लगी हुई है और सेना का कहना है कि यह लड़ाई अब निर्णायक दौर में है.

इस युद्ध के चलते देश के उत्तरी इलाक़े में लाखों तमिलों को विस्थापित होना पड़ा है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई प्रमुख सहायता एजेंसियों के कर्मचारी इस इलाक़े को छोड़कर जा चुके हैं.

प्रस्ताव

डीएमके प्रमुख करुणानिधि के नेतृत्व में मंगलवार को चेन्नई में एक बैठक हुई थी. इस बैठक में डीएमके के अलावा कांग्रेस, वामपंथी दल और कुछ अन्य दल के नेता उपस्थित थे.

मुख्यविपक्षी दल एआईडीएमके, एमडीएमके और उनके सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस बैठक का यह कहकर बहिष्कार किया कि यह एक धोखा है.

इस सर्वदलीय बैठक में एक छह सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया.

इस प्रस्ताव में श्रीलंका में हो रही मौतों पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि श्रीलंका को भारत से हथियार दिए जा रहे हैं इसे तुरंत रोका जाना चाहिए.

सभी दलों ने कहा है कि भारत सरकार को श्रीलंका के मामले में तुरंत दखल देना चाहिए. सरकार को इसके लिए दो हफ़्तों का समय देते हुए चेतावनी दी गई है कि इसके बाद सारे तमिल सांसद अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे देंगे.

इस प्रस्ताव में युद्धविराम के बाद वहाँ प्रभावित और विस्थापित हुए तमिलों को केंद्र सरकार की ओर से तुरंत राहत सामग्री भिजवाने और इस सामग्री को ज़रुरतमंदों तक पहुँचाना सुनिश्चित करने को कहा गया है.

इस प्रस्ताव में भारतीय मछुवारों की समस्या भी हल करने की माँग की गई है.

इस बैठक के बाद बीबीसी तमिल सेवा से बात करते हुए करुणानिधि ने कहा, "हम इस संबंध में प्रधानमंत्री, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और प्रणव मुखर्जी से मिलेंगे और तत्काल आवश्यक क़दम उठाने की माँग करेंगे."