सोमवार, 13 अक्तूबर, 2008 को 03:26 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उड़ीसा और कर्नाटक की हाल की हिंसा को बेहद दुखद और ख़तरनाक बताया है.
सोमवार को राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) की दिल्ली में आयोजित बैठक का उदघाटन करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा,'' जो लोग सांप्रदायिक सद्भभाव, एकता और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को चुनौती देते हैं, उनको कड़ी सज़ा दिए जाने की ज़रूरत है.''
प्रधानमंत्री का कहना था कि घृणा और हिंसा का वातावरण कृतिम रूप से तैयार किया जाता है
उनका कहना था कि जातीय और सांप्रदायिक हिंसा से निबटने के तरीकों पर देश में बहस चल रही है. लेकिन इस बारे में दो राय नहीं हो सकती कि ऐसी कोशिशों को पूरी सख्ती से निबटा जाना चाहिए.
ये बैठक सोमवार शाम तक चलेगी और इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हिस्सा ले रहे हैं.
बैठक में बजरंग दल पर प्रतिबंध की मांग भी उठने की उम्मीद है.
प्रेक्षकों का मानना है कि इस बैठक में विभिन्न दलों का राजनीतिक एजेंडा हावी रहेगा.
बजरंग दल पर बवाल
इस बैठक से पहले उड़ीसा के कंधमाल और कर्नाटक में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों पर प्रतिबंध की मांग ने भी ज़ोर पकड़ा है.
यूपीए के एक घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने एनआईसी बैठक में इस पर चर्चा की मांग की थी.
राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव भी उड़ीसा और कर्नाटक की घटनाओं को लेकर बजरंग दल पर प्रतिबंध की माँग करते रहे हैं.
उड़ीसा में ईसाइयों पर हमले जारी रहने के बाद नवीन पटनायक सरकार को बर्ख़ास्त करने का दबाव भी बना है.
इन मांगों पर कई बार चर्चा होने के बाद भी आम सहमति नहीं बन पाने के कारण यूपीए सरकार ने कोई फ़ैसला नहीं किया है.
माना जा रहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री बजरंग दल पर प्रतिबंध की मांग का विरोध कर सकते हैं.
सरकार का समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह को हाल ही में एनआईसी में शामिल किया गया है और माना जा रहा है कि वो इस बैठक में जामिया नगर में हाल में हुई मुठभेड़ की जांच का मुद्दा उठा सकते हैं.
इस बैठक में आतंकवाद के साथ मुसलमानों का नाम जोड़े जाने पर भी चर्चा होगी.