रविवार, 12 अक्तूबर, 2008 को 07:14 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने पिछले दिनों दिल्ली के जामिया नगर में हुई मुठभेड़ की न्यायिक जाँच की माँग को ख़ारिज कर दिया है.
उनका कहना है कि मुठभेड़ को फ़र्ज़ी क़रार देना हास्यास्पद है.
ग़ौरतलब है कि केन्द्र में यूपीए के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अमर सिंह सहित कई मानवाधिकार संगठन इस मामले की न्यायिक जाँच की माँग कर रहे हैं.
सतारूढ़ कांग्रेस के कई नेताओं ने भी व्यक्तिगत रूप से न्यायिक जाँच की माँग की हिमायत की है.
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में एमके नारायणन ने कहा, "जामिया नगर मुठभेड़ की न्यायिक जाँच की कोई आवश्यकता नहीं है."
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उधर हिंदू राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के बारे में पूछे गए सवाल पर उनका कहना था, " पाबंदी के बजाए ज़्यादा अच्छा होगा कि इस तरह के संगठनों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए."
बजरंग दल पर निगरानी
नारायणन के अनुसार 'बजरंग दल के अधिक से अधिक सदस्यों को गिरफ़्तार करने की ज़रूरत है.'
ग़ौरतलब है कि सरकार बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सोच रही है और बजरंग दल पर प्रतिबंध जैसे मुद्दे सोमवार को प्रस्तावित राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में उठ सकते हैं.
बजरंगदल पर उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाइयों पर हमले करने का आरोप है.
उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर को दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में पुलिस की कुछ संदिग्ध लोगों से मुठभेड़ हुई थी जिसमें दो संदिग्ध व्यक्ति और एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई थी.
इस मुठभेड़ के बाद से ही स्थानीय लोगों ने इसके फ़र्ज़ी होने पर सवाल उठाए थे.
साथ ही इस्लामी संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, अध्यापकों और पत्रकारों की एक अन्य समिति ने भी पुलिस की भूमिका को लेकर ऐसे ही सवाल उठाए हैं.
दिल्ली पुलिस का दावा है कि इन संदिग्ध लोगों का ताल्लुक़ दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पिछले दिनों हुए बम धमाकों से है.